धुरी, पंजाब। केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर कड़ी Kritik करने का सिलसिला जारी रखा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान अपने चुनावी वादों को पूरा करने में नाकाम रहे हैं, जिससे राज्य के लोगों में सरकार के प्रति निराशा बढ़ती जा रही है।
रवनीत सिंह बिट्टू ने मीडिया से बातचीत में बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान आम आदमी पार्टी ने महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये देने का बड़ा वादा किया था, लेकिन अभी तक यह योजना लागू नहीं हुई है। इसके अलावा, सरकार ने हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने व बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के भी प्रबंधन का दावा किया था, जो जमीन पर कहीं दिखाई नहीं दे रहा।
उन्होंने बताया कि जब वे पहली बार धुरी जिले के किसी गांव में गए थे, तो ग्रामीणों ने सीधे उनके सामने दिसंबर की तरह कह दिया कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों की पूर्ति नहीं हो पा रही है। गांवों में शिक्षक कम हैं और बच्चों को सही पढ़ाई के अवसर नहीं मिल रहे। बिट्टू ने जोर देकर कहा कि यह स्थिति सरकार की नीतियों की विसंगति को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि कई गांवों में लोग अपनी मांगों के लिए खुले धरने पर बैठे हैं, जिससे साफ पता चलता है कि जनता सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं है। बिट्टू ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पंजाब की स्थिति को कमजोर किया है।
धुरी क्षेत्र जहां से भगवंत मान विधायक और मुख्यमंत्री बने हैं, वहां अब उनकी राजनीतिक पकड़ कमजोर होने लगी है। बिट्टू ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब राजनीति सिर्फ चुनाव जीतने-हारने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि उसके उम्मीदवार जीतें।
बिट्टू की यह टिप्पणी उस समय आई है जब पंजाब की राजनीति में बदलाव के संकेत स्पष्ट तौर पर नजर आ रहे हैं और विपक्षी दल सक्रियता से अपनी जगह बनाने में जुटे हैं। जनता की उम्मीदें बरकरार हैं तथा वे सच्चे विकास की दिशा में काम करने वाली सरकार की अपेक्षा करते हैं।
इस संदर्भ में राजनीतिक विश्लेषक भी मानते हैं कि पंजाब सरकार को अपने वादों को पूरा करने और जनता की समस्याओं के समाधान के लिए तेजी से काम करना होगा, अन्यथा आगामी चुनावों में इसका खामियाजा भुगतन पड़ सकता है।
