चंडीगढ़, हरियाणा। हरियाणा में लिंगानुपात को सुधारने की दिशा में राज्य सरकार ने कठोर कार्रवाई करते हुए चार वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। यह निर्णय इस बात को लेकर उठाया गया है कि संबंधित अधिकारी लिंगानुपात सुधार से जुड़े कार्यक्रमों की निगरानी और क्रियान्वयन में गंभीर लापरवाही कर रहे थे।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने मंगलवार को यह कार्रवाई की घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य में लिंगानुपात में गिरावट ने सरकार की संवेदनशीलता को बढ़ा दिया है और इसे सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। अवैध लिंग निर्धारण और कन्या भ्रूण हत्या पर रोक के उद्देश्य से लागू किए गए कार्यक्रमों की प्रभावी कार्यवाही न होने पर यह सख्त कार्रवाई जरूरी हो गई।
निलंबित अधिकारियों में सोनीपत के पुरखास सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की एसएमओ डॉ. टीना आनंद, यमुनानगर के रादौर सीएचसी की एसएमओ डॉ. विजय परमार, रोहतक के चिड़ी सीएचसी के एसएमओ डॉ. सतपाल एवं नारनौल के सहलांग सीएचसी की चिकित्सकीय अधिकारी डॉ. प्रभा शामिल हैं। इन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर राज्य के विभिन्न सिविल सर्जन कार्यालयों से जोड़ा गया है।
सरकार ने हरियाणा सिविल सेवा नियम, 2016 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू कर दी है। आदेश में अधिकारियों की खराब कार्यप्रणाली और लिंगानुपात सुधार में दिखाए गए उदासीनता को इस कदम का मुख्य कारण बताया गया है। यह कार्रवाई राज्य प्रशासन की महिलाओं एवं बालिकाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और जनसांख्यिकीय संतुलन सुधारने की नीति का स्पष्ट उदाहरण है।
आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष पहली तिमाही में हरियाणा का लिंगानुपात 895 लड़कियों प्रति 1000 लड़कों का रहा, जो पिछले वर्ष के 925 से काफी नीचे है। कई जिलों में गिरावट चिंताजनक स्थिति दर्शाती है। विशिष्ट रूप से चरखी दादरी जिले में सबसे कम लिंगानुपात 769 रहा, इसके बाद अंबाला में 843, महेंद्रगढ़ में 847, गुरुग्राम में 863 और जींद में 872 है।
वहीं करनाल जिले ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है, जहां लड़कियों का अनुपात 968 प्रति 1000 लड़कों का दर्ज किया गया है। इसके बाद फरीदाबाद और कुरुक्षेत्र जिलों का स्थान रहा, जहां दोनों का आंकड़ा 932 है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि राज्य के कुछ क्षेत्र लिंगानुपात सुधार के लिए बेहतर परिणाम ला रहे हैं, जबकि दूसरे क्षेत्र अभी भी चुनौती बने हुए हैं।
सरकार ने इस मुद्दे को लेकर आगे भी सख्त रुख अपनाने की बात कही है और चाहती है कि सभी अधिकारी पूर्ण रूप से कर्तव्यनिष्ठ होकर नियमों का पालन करें। साथ ही समाज में महिलाओं के प्रति सकारात्मक सोच और सम्मान बढ़ाने के लिए जागरुकता अभियान भी तेज किया जाएगा।
यह कदम हरियाणा सरकार द्वारा बाल संरक्षण और बालिकाओं के प्रति समानाधिकार सुनिश्चित करने की ओर एक महत्वपूर्ण प्रयास है। जन जीवन की गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ सामाजिक न्याय की दिशा में यह कार्रवाई बड़ी भूमिका निभाएगी।
