यमुना नदी के प्रदूषण पर हरियाणा सरकार करेगी कड़ा नियंत्रण, ड्रोन सर्वे और रियल-टाइम मॉनिटरिंग लागू

चंडीगढ़, हरियाणा। हरियाणा सरकार ने यमुना नदी के प्रदूषण को रोकने एवं नदी को पुनर्जीवित करने के लिए एक व्यापक कार्य योजना शुरू की है। यह योजना मुख्य रूप से सीवेज उपचार, औद्योगिक कचरा प्रबंधन और नालों में प्रदूषण की रियल-टाइम निगरानी पर केंद्रित है, ताकि दिल्ली में प्रवेश करने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके।

राज्य के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने मंगलवार को इस योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया कि इसका उद्देश्य यमुना नदी में गिरने वाले नालों से निकलने वाले दूषित जल को रोकना है। इसके लिए सीवेज उपचार संयंत्रों के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है ताकि बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) के स्तर को कम किया जा सके। साथ ही, औद्योगिक कचरे की कड़ी निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।

समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने गृह मंत्रालय द्वारा प्रदत्त निर्देशों के अनुसार सीवेज और औद्योगिक कचरा प्रबंधन को प्रभावी ढंग से लागू करने पर बल दिया। खासकर हरियाणा से दिल्ली में प्रवेश करने वाले नालों जैसे नाला नंबर 6, मुंगेशपुर नाला, बुपानिया नाला और पालम विहार नाला में प्रदूषण नियंत्रण के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई।

हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष विनय प्रताप सिंह ने बताया कि राज्य में यमुना में गिरने वाले सभी नालों का जोन-वार ड्रोन सर्वेक्षण किया जाएगा। इस सर्वेक्षण के जरिये नालों में पानी के बहाव और गुणवत्ता दोनों की रियल-टाइम निगरानी करना संभव होगा। प्रदूषण के हॉटस्पॉट्स की पहचान कर इनके स्रोतों तक पहुंच कर प्रदूषण नियंत्रण किया जाएगा, ठीक उसी तरह जैसे दिल्ली में पहले से संचालित किया जा रहा है।

हरियाणा में वर्तमान में 34 कस्बों में 90 सीवेज उपचार संयंत्र (एसटीपी) स्थापित हैं, जिनकी कुल उपचार क्षमता 1,518 मिलियन लीटर प्रतिदिन है। इसके अतिरिक्त, चार नए एसटीपी निर्माणाधीन हैं जिनकी क्षमता 170 एमएलडी है, एवं नौ पुराने एसटीपी को अपग्रेड करके 227 एमएलडी की क्षमता हासिल की जा रही है।

औद्योगिक अपशिष्ट जल प्रबंधन के तहत 17 कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) संचालित हैं जिनकी संयुक्त क्षमता 184.5 एमएलडी है। दो सीईटीपी के अपग्रेडेशन के साथ-साथ आठ नए सीईटीपी प्रस्तावित हैं जिनकी कुल क्षमता 146 एमएलडी होगी।

भविष्य की योजना के तहत नौ नए एसटीपी का निर्माण किया जाएगा, जिनकी संयुक्त क्षमता 510 एमएलडी होगी। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एसटीपी, सीईटीपी और नाला टैपिंग परियोजनाओं को शामिल करते हुए विस्तृत कार्य योजना तैयार की है, जिसका कार्य दिसंबर 2025 से दिसंबर 2028 तक पूरा किया जाना है।

इस योजना के क्रियान्वयन से यमुना नदी में गिरने वाले प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी। सरकार की यह पहल न केवल हरियाणा बल्कि दिल्ली और उससे जुड़े क्षेत्रों के पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

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