चंडीगढ़, हरियाणा। हरियाणा सरकार ने यमुना नदी के प्रदूषण को कम करने के लिए एक प्रभावी और व्यापक रणनीति तैयार की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य नदी में गिरने वाले प्रदूषित जल के प्रवाह को नियंत्रित करना और दिल्ली में प्रवेश करने वाले दूषित पानी को रोकना है।
सरकार की योजना के तहत सीवेज उपचार और औद्योगिक कचरे के प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके साथ ही राज्य में प्रदूषण की रियल-टाइम निगरानी के लिए ड्रोन सर्वेक्षण जैसे आधुनिक तकनीकी उपाय अपनाए जा रहे हैं। इससे प्रदूषित नालों और नदियों की गुणवत्ता लगातार मापी जाएगी ताकि प्रदूषण के स्रोतों की तुरंत पहचान हो सके और समय पर कार्रवाई की जा सके।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने इस योजना की प्रगति की समीक्षा की और निर्देश दिए कि सभी संबंधित विभाग जल्द से जल्द निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करें। उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा से दिल्ली में जाने वाले नालों जैसे नाला नंबर 6, मुंगेशपुर नाला, बुपानिया नाला और पालम विहार नाला की विशेष मॉनिटरिंग की जाएगी।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष विनय प्रताप सिंह ने बताया कि जोन-वार ड्रोन सर्वेक्षण के जरिये यमुना नदी में गिरने वाले सभी नालों का नक्शा तैयार किया जाएगा। यह सर्वे pollution hotspots की पहचान करने में मदद करेगा और निगरानी को और सशक्त बनाएगा।
हरियाणा में अभी तक कुल 90 सीवेज उपचार संयंत्र (एसटीपी) चालू हैं जिनकी कुल उपचार क्षमता 1,518 मिलियन लीटर प्रति दिन है। इसके अलावा, चार और संयंत्र निर्माणाधीन हैं और नौ एसटीपी को अपग्रेड किया जा रहा है ताकि उनकी दक्षता बढ़ाई जा सके। औद्योगिक क्षेत्र में 17 कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) काम कर रहे हैं। दो प्लांटों को अपग्रेड किया जा रहा है और आठ नए सीईटीपी प्रस्तावित हैं।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार ने दिसंबर 2025 से दिसंबर 2028 तक कई परियोजनाओं पर काम करने की योजना बनाई है। इसमें नए सीवेज उपचार संयंत्रों का निर्माण, नालों में टैपिंग कार्य और औद्योगिक कचरे की निगरानी शामिल है।
इस नई योजना से यमुना नदी के प्रदूषण पर नियंत्रण करने में मदद मिलेगी और नदियों के पर्यावरणीय सुधार में महत्वपूर्ण योगदान होगा। हरियाणा सरकार का यह प्रयास एक स्वस्थ और स्वच्छ जलमंडल बनाने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है।
