ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर के लिए पेड़ों की कटाई पर रोक: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

चंडीगढ़, पंजाब-हरियाणा। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर परियोजना में पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है, जिससे यह विवादित प्रोजेक्ट फिलहाल रुका हुआ है। उच्च न्यायालय की बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी शामिल थे, ने इस मामले की सुनवाई करते हुए शहर में पेड़ों की कटाई पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया।

न्यायालय ने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन और अन्य संबंधित पक्ष ट्रिब्यून चौक के आसपास आम के पेड़ और अन्य किसी भी पेड़ को काटने से बचेंगे, जब तक कि अंतिम निर्णय नहीं आ जाता। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश अंतिम फैसले के अधीन है।

इस रोक की मांग याचिकाकर्ता जगवंत बाथ और अन्य ने पर्यावरणीय संरक्षण के दृष्टिकोण से की थी। याचिकाकर्ताओं ने यह आरोप लगाया कि इस परियोजना के कारण शहर के प्रमुख वृक्षों की कटाई से न केवल पर्यावरणीय क्षति होगी बल्कि यह चंडीगढ़ की पारंपरिक विरासत के भी विरुद्ध है।

याचिकाकर्ताओं ने पंजाब की राजधानी अधिनियम, 1952 और पंचवर्षीय मास्टर प्लान 2031 का हवाला देते हुए कहा कि फ्लाईओवर का निर्माण इन कानूनों और नियोजन दिशानिर्देशों के खिलाफ है। उनका तर्क है कि मास्टर प्लान के अनुसार फ्लाईओवर का प्रस्तावित निर्माण अनुमति योग्य नहीं है और इसके स्थान पर यातायात नियंत्रण के वैकल्पिक उपायों का शोध किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी बताया कि शहरी नियोजन विभाग ने प्रारंभ में इस परियोजना का विरोध किया था, क्योंकि योजना के तहत फ्लाईओवर बनाने की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद, केंद्र सरकार के केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने चंडीगढ़ को इस योजना के लिए मंजूरी प्रदान की है।

यह फ्लाईओवर ट्रिब्यून चौक पर यातायात जाम को कम करने हेतु प्रस्तावित है, लेकिन परियोजना में देरी और विवाद के कारण इसकी लागत में स्थिर वृद्धि देखी गई है। 2019 में यह लागत लगभग 137 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 200 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गई है, जो सात वर्षों में लगभग 45 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।

परियोजना की रूपरेखा के अनुसार, यह लगभग 1.6 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर सेक्टर 32 गोलचक्कर के पास स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज के बाद शुरू होकर रेलवे ओवरब्रिज तक जाएगा। इसका उद्देश्य शहर में यातायात की भीड़ को कम करना है, क्योंकि ट्रिब्यून चौक से गुजरने वाला यातायात शहर के प्रमुख मार्गों में से एक है।

यह मामला पर्यावरण संरक्षण और शहरी विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को दर्शाता है, जहां अदालत ने परियोजना की हरी झंडी से पहले पर्यावरणीय प्रभावों की गहन समीक्षा और कानूनी पहलुओं की जांच के निर्देश दिए हैं। ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर की यह स्थिति अब याचिका के अंतिम निर्णय तक बनी रहेगी।

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