3 नवंबर को अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने जा रहा है, जिसमें हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट के सदस्यों का चुनाव होगा। ये चुनाव डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के बाकी बचे दो सालों की इमिग्रेशन नीति पर प्रभाव डाल सकता है। खासकर भारतीय प्रवासियों के लिए H-1B वीजा, ग्रीन कार्ड और स्टूडेंट वीजा के नियम में बदलाव की संभावना है।
H-1B वीजा और संसद का अहम रोल
भारतीय IT पेशेवरों के लिए H-1B वीजा बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसके तहत हर साल 65,000 रेगुलर वीजा और अतिरिक्त 20,000 वीजा उन छात्रों के लिए होते हैं जिन्होंने अमेरिकी विश्वविद्यालय से मास्टर्स या उससे ऊपर की डिग्री हासिल की हो। संसदीय सदस्यों के पास इस वीजा से जुड़ी लिमिट और नियम बदलने का अधिकार है, लेकिन नियमों में बदलाव सिर्फ तभी होगा जब नया कानून पास होगा।
डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) और यूएससीआईएस वीजा आवेदनों की प्रक्रिया और जांच करते हैं। चाहे डेमोक्रेट्स बने संसद में बहुमत या रिपब्लिकन, H-1B नियम अपने आप नहीं बदलेंगे। सांसदों को कानून बनाकर इससे जुड़ी सीमाएं तय करनी होती हैं।
ग्रीन कार्ड और भारतीय आवेदकों की स्थिति
भारतीय आवेदकों के लिए ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा समय काफी लंबी है। अमेरिकी कानून के मुताबिक, किसी भी देश को सालाना ग्रीन कार्ड का 7% से अधिक हिस्सा नहीं दिया जाता, इसी वजह से भारतीयों का इंतजार लंबा होता है।
- संसद इस 7% सीमा को हटाने या बैकलॉग को खत्म करने के लिए नए नियम ला सकती है।
- सरकार ग्रीन कार्ड की प्रोसेसिंग की गति भी निर्धारित करती है।
- हालांकि नए संसद के आने पर भी यह बैकलॉग तुरंत खत्म नहीं होगा, लेकिन सुधार की संभावनाएं बनती हैं।
यह चुनाव इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि संसद नए इमिग्रेशन सुधारों के लिए कानून बना सकती है, जो भारतीय आवेदकों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।
भारतीय छात्रों के लिए स्टूडेंट वीजा नियम
स्टूडेंट वीजा संबंधी नियम संसद में बनाए जाते हैं, लेकिन पढ़ाई की अवधि, एडमिशन और पढ़ाई के बाद रुकने जैसे नियम DHS तय करता है। जुलाई 2026 में DHS ने F-1 वीजा में ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ हटाकर एक निश्चित समय सीमा लागू कर दी, जो 15 सितंबर 2026 से शुरू हुई।
इस बदलाव से पता चलता है कि प्रशासन संसद की अनुमति के बिना भी बड़े बदलाव कर सकता है। भारतीय छात्रों के लिए यह नियम काफी मायने रखते हैं और आगे भी प्रशासनिक बदलाव इस क्षेत्र को प्रभावित करेंगे।
अमेरिका में होने वाला यह मिडटर्म चुनाव सिर्फ राजनीतिक सत्ता के बदलाव का नहीं बल्कि भारतीयों के वीजा और इमिग्रेशन नियमों पर भी गहरा असर डाल सकता है। आव्रजन नियम किस दिशा में जाएंगे, यह संसद के नियंत्रण और प्रशासन के फैसलों पर निर्भर करेगा।
