मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की सत्ता की असली परीक्षा शुरू

अमेरिका में मिड-टर्म चुनावों का दौर जारी है, जो डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। पिछले 32 दिनों में ट्रंप ने 20 राज्यों में चुनाव प्रचार किया है, पर वे हारने के पक्ष में नहीं हैं। चुनाव का नतीजा यह तय करेगा कि अगले दो वर्षों में ट्रंप कितना प्रभावी रूप से अपना एजेंडा चला पाएंगे।

मिड-टर्म चुनाव का महत्त्व

यह चुनाव राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच में होता है, लेकिन राष्ट्रपति खुद इस चुनाव में सीधा उम्मीदवार नहीं होते। इस बार रिपब्लिकन पार्टी का दोनों सदनों में बहुमत बचाना आवश्यक है। अगर वे बहुमत खोते हैं, तो ट्रंप को कांग्रेस के सामने अपनी नीतियां मनवाने में मुश्किल होगी और उनकी सत्ता कमजोर हो जाएगी।

इस चुनाव की खास बात यह है कि यह केवल कांग्रेस की सीटों का मुकाबला नहीं है, बल्कि ट्रंप की राजनीतिक ताकत की परख भी है। अमेरिका में इतिहास बताता है कि राष्ट्रपति की पार्टी मिड-टर्म चुनावों में कमजोर प्रदर्शन करती रही है। यह एक आम समस्या है जिसे ट्रंप भी भली-भांति समझते हैं।

वर्तमान राजनीतिक स्थिति और ट्रंप की रणनीति

प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन्स के पास 218 सीटें हैं जबकि डेमोक्रैट्स के पास 214 हैं। सीनेट में रिपब्लिकन्स के 53 और डेमोक्रैट्स के 45 सदस्य हैं। कुल मिलाकर 435 सीटों पर मतदान हो रहा है और 100 सीटों में से 35 पर लड़ाई हो रही है। महिला मतदान का रिकॉर्ड भी बहुत ऊँचा रहा है, पहले ही पांच करोड़ 70 लाख से ज्यादा लोग वोट दे चुके हैं।

ट्रंप ने चेतावनी दी है कि वह चुनाव हार गए तो सरकार चलाना उनके लिए बहुत मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा, डेमोक्रैट्स बहुमत में आए तो वह न्यायिक नियुक्तियों और बजट को मंजूरी देने में अड़चन पैदा कर सकते हैं। इसीलिए व्हाइट हाउस ने एक वैकल्पिक रणनीति तैयार की है ताकि बिना कांग्रेस की मदद के भी निर्णय लिए जा सकें।

ट्रंप ने इस चुनाव को बेहद महत्वपूर्ण मानते हुए कहा कि अगर उनकी पार्टी के समर्थक समय पर वोट डालें तो वे भारी बहुमत से जीतेंगे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मिड-टर्म चुनाव राष्ट्रपति के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने कड़ी टक्कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की पक्ष में अधिक मेल-इन बैलेट की गिनती रोकने की मांग अस्वीकार कर दी है। इसके साथ ही डेमोक्रैटिक पार्टी के लिए जनादेश ज्यादा मजबूत दिख रहा है क्योंकि सर्वेक्षणों में 46 प्रतिशत वोटर्स डेमोक्रैट्स का समर्थन कर रहे हैं।

ट्रंप की राजनीतिक ताकत पर यह चुनाव उनकी असली परीक्षा बनने वाला है। यदि वे हारते हैं तो उनकी नीतियों पर अंकुश लगेगा और प्रशासन विरोधियों की जांच के खतरे में होगा। इसी वजह से यह चुनाव उनकी राजनीतिक विरासत के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।

इस समय अमेरिका में वोटिंग जारी है और नतीजे धीरे-धीरे सामने आएंगे। ट्रंप की सत्ता के लिए यह एक वास्तविक झटका भी हो सकता है या फिर उनकी फिर से दबदबा कायम करने की शुरुआत, यह चुनाव तय करेगा।

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