Sprouts हेल्दी हैं, लेकिन इन लोगों को रोजाना नहीं खाने चाहिए

हाल के वर्षों में प्रोटीन से भरपूर शाकाहारी आहार की चर्चा बढ़ते ही अंकुरित अनाज यानी स्प्राउट्स का रुझान भी बढ़ा है। आज इन्हें सुपरफूड माना जाता है। लेकिन आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरक संहिता’ के अनुसार, स्प्राउट्स का रोजाना सेवन हर किसी के लिए सही नहीं। डॉ. सुहास एच. डी., मुख्य चिकित्सा अधिकारी, श्री शारदा धन्वंतरि आयुर्वेद अस्पताल, श्रृंगेरी बताते हैं कि यह पाचन के लिहाज से भारी होते हैं और लगातार खाने से पाचन तंत्र में दिक्कत हो सकती है।

स्प्राउट्स खाने में किन बातों का ध्यान रखें?

आयुर्वेद में स्प्राउट्स को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ मिलाकर नहीं खाने की सलाह दी जाती है। खासतौर पर डेयरी उत्पादों के साथ जैसे दूध के तुरंत बाद स्प्राउट्स खाना हानिकारक माना जाता है। ऐसा करने से पाचन क्रिया प्रभावित होती है और मेटाबॉलिज्म में समस्या हो सकती है।

जिन लोगों को शरीर में सूजन या ऑटोइम्यून बीमारियां हैं, उन्हें स्प्राउट्स खाने से बचना चाहिए। पाचन शक्ति कमजोर होने पर भी कच्चे स्प्राउट्स से गैस और पेट फूलने की समस्या बढ़ सकती है। कुछ लोग बहुत अधिक मात्रा में स्प्राउट्स खाने से एसिडिटी जैसी परेशानियों का सामना भी कर सकते हैं।

विटामिन K और थायरॉइड पर प्रभाव

अल्फाल्फा स्प्राउट्स में एल-कैनावेनाइन नामक यौगिक होता है, जो ऑटोइम्यून बीमारियों के लक्षण बढ़ा सकता है। यह खासकर सिस्टेमिक लुपस एरिथेमेटोसस (SLE) में समस्या पैदा कर सकता है।

इसके अलावा, अल्फाल्फा, ब्रोकली, क्लोवर जैसे स्प्राउट्स में विटामिन K होता है जो रक्त के थक्के जमाने में मदद करता है। विटामिन K की अधिकता या कमी रक्त पतला करने वाली दवाओं की प्रभावकारिता को कम कर सकती है।

क्रूसिफेरस स्प्राउट्स जैसे ब्रोकली और मूली में मौजूद गोइट्रोजेन यौगिक थायरॉइड के आयोडीन अवशोषण को रोक सकते हैं, जिससे हाइपोथायरायडिज्म समस्या और बढ़ सकती है।

स्प्राउट्स के फायदे भी खास हैं। बीमार, कमजोर या कुपोषित लोगों के लिए ये महत्वपूर्ण पोषक तत्वों का स्रोत हैं। मूंग के स्प्राउट्स हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं, रक्त दबाव नियंत्रित करते हैं और शुगर स्तर को मेंटेन रखते हैं। मसूर और चने के अंकुरित दाने प्रोटीन, आयरन और फाइबर प्रदान करते हैं जो ऊर्जा व कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करते हैं।

अंकुरित साबुत अनाज जैसे गेहूं, जौ और क्विनोआ में ग्लूटेन और स्टार्च की मात्रा कम होती है, जिससे ये आसानी से पचने वाले और ऊर्जा देने वाले आहार बन जाते हैं।

स्प्राउट्स को भाप में पकाकर या अच्छी तरह पकाने से पाचन पर भार कम होता है। घी और पाचन में मदद करने वाले मसाले जैसे जीरा मिलाना भी फायदेमंद होता है जिससे उनकी ठंडक और सूजन कम होती है। आयुर्वेद के अनुसार स्प्राउट्स को सीमित मात्रा में और सही तरीके से लेना बेहतर होता है ताकि इनके पोषक तत्वों का सही लाभ मिल सके।

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