आगरा। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने घरेलू हिंसा की शिकायतों पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं से जुड़ी शिकायतों में सबसे ज्यादा मामले घरेलू हिंसा के आते हैं। कई छोटी शिकायतें ऐसी हैं जिन्हें पुलिस थोड़ी संवेदनशीलता और तत्परता दिखाकर थाने में ही सुलझा सकती है, फिर भी ये विवाद आयोग तक पहुंचते हैं।
शिकायतों का स्वरूप और पुलिस की भूमिका
बबीता चौहान ने बताया कि कई महिलाएं मुकदमा नहीं लड़ना चाहतीं। वे कानूनी कार्रवाई से बचते हुए केवल समाधान या परेशान व्यक्ति से छुटकारा चाहती हैं। ऐसे मामले भी आयोग तक आते हैं, जहां पुलिस संवेदनशील होकर तत्काल कार्रवाई कर सकती है, लेकिन अक्सर देरी हो जाती है। अध्यक्ष ने पुलिस की जांच प्रक्रिया में समय लगने की बात स्वीकार की, लेकिन कहा कि पीड़ितों को शीघ्र राहत मिलनी चाहिए।
उन्होंने पुलिस से अपील करते हुए कहा कि थाने पर आने वाले महिलाओं की बात ध्यान से सुनी जाए और उन्हें भरोसा दिया जाए। कभी-कभी कुछ मिनटों की ध्यानपूर्वक सुनवाई से पीड़ित को मानसिक राहत मिल जाती है। चौहान ने पुलिस का व्यवहार सुधारने की जरूरत बताई और कहा कि पुलिस अभी पूरी तरह से मित्रवत नहीं हो पाई है।
अधिकारी और पुलिस का सहयोग मिलने के बावजूद शिकायतों की संख्या बढ़ रही है। इसका एक कारण पुलिस स्तर पर ठीक से सुनवाई का अभाव भी है। महिलाओं की जागरूकता बढ़ने से आज छोटी समस्याओं के लिए भी वे आयोग या थाने पहुंचती हैं। इसके बावजूद दोनों की भूमिका में कार्रवाई सुनिश्चित होती है।
परिवारों की जिम्मेदारी और बेटियों का संरक्षण
बबीता चौहान ने महिलाओं के परिवारों को जागरूक रहने की सलाह दी। उन्होंने मथुरा में एक महिला के ससुराल में दुष्कर्म के एक मामले का उल्लेख किया, जहां परिवार ने सामाजिक समझौते के तहत उसे वापस भेज दिया था, जिसके बाद दुर्व्यवहार दोबारा हुआ। उन्होंने सवाल किया कि क्या शादी के बाद परिवार की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है।
उन्होंने चार महीने शादी हुई एक लड़की का भी उदाहरण दिया, जो बार-बार मायके आ-जा रही थी और उसे जबरदस्ती वापस ले जाया गया। चौहान ने कहा कि लड़कियों को गलत रिश्ते की सजा पूरी जिंदगी नहीं भुगतनी चाहिए।
कई बार जब मुश्किलें आती हैं तब बिचौलिये सामने नहीं आते और इसका खामियाजा लड़कियों को भुगतना पड़ता है। उन्होंने माता-पिता से बेटियों के साथ खड़े रहने और उनके अधिकार समझने की अपील की। लड़कियों से भी कहा कि वे जल्दबाजी में निर्णय न लें और अपनी जिंदगी के फैसले सोच-समझकर करें।
बबीता चौहान ने भरोसा दिलाया कि आयोग में आने वाली हर शिकायत का जल्द और उचित निस्तारण किया जाएगा। यह महत्वपूर्ण है कि महिला शिकायतों का सही समाधान हो, ताकि पीड़ितों को उनके अधिकार और सुरक्षा मिल सके।
