विश्व में युद्धों की संख्या बढ़ने के साथ महिलाओं और लड़कियों को गंभीर खतरे का सामना करना पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र की 26 अक्टूबर को जारी रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में हर चार युद्ध में मारे गए आम लोगों में से एक महिला या लड़की थी। इस प्रकार महिलाओं की युद्ध में मौत का आंकड़ा दोगुना हो गया है।
महिलाओं पर युद्ध के प्रभाव और खतरे
रिपोर्ट बताती है कि करीब 75 करोड़ महिलाएं और लड़कियां उन युद्ध प्रभावित इलाकों के करीब रहती हैं, जहां लड़ाई जारी है। यह संख्या 2024 की तुलना में 4 करोड़ अधिक है। साथ ही, यौन हिंसा के मामले 2022 से 2025 के बीच चार गुना बढ़ गए हैं। गरीब महिलाएं युद्ध का और अधिक शिकार बन रही हैं, जिन्हें रोजाना तीन डॉलर से भी कम में जीवन यापन करना पड़ता है।
युद्ध के दौरान महिलाओं को बिना वेतन वाले घरेलू कार्य और परिवार की देखभाल में पुरुषों की तुलना में पांच गुना अधिक समय व्यतीत करना पड़ता है। इस तरह उनकी जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं जो उनके लिए अतिरिक्त चुनौती बनती हैं।
संयुक्त राष्ट्र महिला की कार्यकारी निदेशक सीमा बाहौस ने बताया कि आज की स्थिति पिछले कई दशकों की तुलना में सबसे गंभीर है। नई सैन्य तकनीकों जैसे ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता उपयोग घनी आबादी वाले इलाकों में आम लोगों के लिए खतरा बढ़ा रहा है।
शांति वार्ता में महिलाओं की कम भागीदारी
2025 में दुनिया भर की 57 शांति प्रक्रियाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 5 प्रतिशत थी, जो 2024 के 7 प्रतिशत से कम है। यह दर्शाता है कि युद्ध प्रभावित इलाकों में रहने वाली महिलाएं शांति वार्ता में अपेक्षित भूमिका नहीं निभा पा रही हैं।
इसके विपरीत, दुनिया का सैन्य खर्च 2025 में रिकॉर्ड 2.9 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। दूसरी ओर, युद्ध प्रभावित इलाकों में काम करने वाली महिलाओं के संगठन वित्तीय तंगी से जूझ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 40 प्रतिशत ऐसे संगठन अगले एक वर्ष में कार्य बंद कर सकते हैं।
ये संगठन महिलाओं को आश्रय प्रदान करने, यौन हिंसा की शिकारों की मदद करने और स्थानीय विवादों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फंडिंग में कटौती से इनकी सेवाओं पर बुरा असर पड़ेगा।
संयुक्त राष्ट्र ने युद्ध प्रभावित महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन को मजबूत करने और महिलाओं के नेतृत्व वाले शांति प्रयासों के समर्थन के लिए स्थायी फंडिंग की मांग की है। सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से कहा गया है कि वे शांति और सुरक्षा के फैसलों में महिलाओं की पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करें।
प्रमुख तथ्य
- 2025 में मारे गए हर चार आम लोगों में एक महिला या लड़की थी।
- 75 करोड़ महिलाएं युद्ध प्रभावित इलाकों के 50 किमी दायरे में रहती हैं।
- यौन हिंसा के मामले 2022-2025 बीच चार गुना बढ़े।
- महिलाएं बिना वेतन वाले घरेलू कार्यों में पुरुषों से पांच गुना अधिक समय बिताती हैं।
पाठक सवाल
महिलाओं की शांति वार्ता में कम भागीदारी क्यों है?
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 में महिलाओं की हिस्सा केवल 5 प्रतिशत था, जिससे वे शांति वार्ताओं में अपना प्रभाव कम दिखा पा रही हैं।
युद्ध प्रभावित इलाकों में महिलाओं के लिए सबसे बड़ी समस्या क्या है?
युद्ध में महिलाओं की मौतें, यौन हिंसा, गरीबी और घरेलू कामों का ओवरलोड जैसी चुनौतियां हैं जो उनका जीवन कठिन बना रही हैं।
