दिल्ली में व्यापारियों के संगठन ने 1 नवंबर की भारत विरोधी रैली टालने की मांग की है, जिससे राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष मुदित अग्रवाल ने व्यापारियों के विरोध को बीजेपी से जुड़े होने का आरोप लगाते हुए इसका कड़ा जवाब दिया है। यह विवाद तब बढ़ा जब विपक्षी नेता राहुल गांधी को व्यापारियों द्वारा रैली स्थगित करने के लिए पत्र लिखा गया।
व्यापारियों के विरोध पर मुदित अग्रवाल का बयान
मुदित अग्रवाल ने कहा कि अधिकांश व्यापारी बीजेपी के प्रभाव में आते हैं और उनका विरोध इसलिए है। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार छोटे व्यापारियों को परेशान करती है, खासकर छोटे व्यवसायियों को। अग्रवाल ने बताया कि हाल ही में राहुल गांधी के नेतृत्व में व्यापारियों के प्रतिनिधि भी सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए मिले थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी इस रैली को लेकर चिंतित हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि 1 नवंबर को होने वाली रैली में करीब 10 लाख लोग जुटेंगे, जिसका पीएम मोदी को डर सता रहा है। अग्रवाल ने व्यापारियों के दावे को भी खारिज किया जिनमें बताया गया कि 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि चांदनी चौक की दुकानदार तो आमतौर पर रविवार को बंद रहते हैं, इसलिए यह नुकसान का आंकड़ा सही नहीं हो सकता।
रैली से व्यापार को होगा फायदा
मुदित अग्रवाल ने यह भी बताया कि जब 10 लाख लोग दिल्ली आएंगे, तो उनका रोजमर्रा खर्च कारोबारियों के फायदे का कारण बनेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली के होटल, छोटे रेस्तरां और फेरीवाले सभी इससे लाभान्वित होंगे। यह लोग दिवाली से ठीक एक हफ्ता पहले दिल्ली आएंगे और वापसी पर अपने राज्यों में भी दिल्ली के व्यापारियों से समान खरीदेंगे। इस तरह छोटे व्यापारियों को बड़ी मदद मिलेगी।
अग्रवाल ने यह भी कहा कि कुछ लोग दिल्ली में रुकेंगे, जिससे गेस्ट हाउस और होटल कारोबार को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि जहां भी लोग जमा होते हैं, वहां व्यापार को फायदा ही होता है और किसी भी तरह का नुकसान नहीं। उन्होंने विपरीत आरोपों को तर्कहीन बताते हुए कहा कि अगर विपक्षी प्रदर्शन या पदयात्रा करता है तो व्यापार को नुकसान माना जाता है, जबकि भाजपा के पदयात्रा से कोई नुकसान नहीं होता।
अग्रवाल ने व्यापारियों के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह विरोध बीजेपी की रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मोदी सरकार की नीतियां छोटे व्यापारियों को बहुत परेशान करती हैं। इसीलिए व्यापारी सरकार की आलोचना करते हैं।
उन्होंने कहा कि रैली को फिलहाल टालने का कोई कारण नहीं है क्योंकि यह दिल्ली के व्यापारियों को नुकसान नहीं बल्कि फायदा पहुंचाएगी। मुदित अग्रवाल ने रैली के आयोजन को लोकतंत्र की मजबूती की मिसाल बताते हुए इसे सफल बनाने की अपील की।
इस बयान के साथ दिल्ली की राजनीतिक गहमागहमी बढ़ गई है। व्यापारियों और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, जबकि रैली के व्यापक आयोजन की तैयारियां जोरों पर हैं। यह रैली राजनीतिक माहौल को गर्म रखने का बहाना बनी हुई है, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपना-अपना रुख लेकर आमने-सामने हैं।
