यूपी MLC चुनाव: वाराणसी में BJP हारी, बागी ने बिगाड़ा खेल, सपा बोले ‘2027 के लिए शुभ संकेत’

उत्तर प्रदेश के एमएलसी चुनाव में वाराणसी की शिक्षक निर्वाचन सीट पर समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव ने भाजपा के उम्मीदवार को हराकर बड़ी जीत हासिल की है। यह चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में हुई, जहां भाजपा का परंपरागत मजबूत कब्जा माना जाता है। इस हार ने भाजपा को बड़ा झटका दिया है, खासकर जब उनके बागी उम्मीदवार ने वोट बंटवारे का कारण बना।

लाल बिहारी यादव की पांच गुना बड़ी जीत

इस बार का चुनाव परिणाम पिछली बार की तुलना में काफी अलग दिखा। लाल बिहारी यादव ने प्रथम वरीयता के वोटों में 10,958 मत प्राप्त किए, जबकि भाजपा के प्रमोद कुमार मिश्रा को 6,060 वोट मिले। पिछली बार लाल बिहारी ने महज 936 वोटों से जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार अंतर करीब 4,900 वोटों का रहा। इस हिसाब से समाजवादी पार्टी को इस सीट पर पांच गुना बड़े अंतर से जीत मिली है।

दूसरी वरीयता की गिनती के बाद लाल बिहारी यादव को विजेता घोषित किया गया। उनका यह प्रदर्शन आगामी विधानसभा चुनाव 2027 के लिहाज से पार्टी के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। सपा का मानना है कि यह जीत उनकी जनता के प्रति बढ़ती स्वीकार्यता और समर्थन का परिणाम है।

बीजेपी के बागी उम्मीदवार ने बिगाड़ा खेल

इस चुनाव की खास बात यह रही कि भाजपा के बागी प्रत्याशी चेत नारायण सिंह ने 3,111 वोट हासिल किए। इस वोट बंटवारे की वजह से भाजपा कमजोर साबित हुई और मुख्य मुकाबले से काफी पीछे रह गई। प्रथम वरीयता के राउंड में चेत नारायण सिंह को 1,696 और दूसरे राउंड में 1,415 वोट मिले।

वहीं, भाजपा के मुख्य प्रत्याशी प्रमोद कुमार मिश्रा को प्रथम राउंड में 3,005 और सेकेंड राउंड में 3,055 वोट मिले। भाजपा के इस आंतरिक मतभेद ने सपा प्रत्याशी के लिए जगह बनाई, जो अंततः जीत में बदल गई।

प्रथम वरीयता के वोटों की कुल गणना में लाल बिहारी यादव 11,472 मत के जरूरी आंकड़े से कुछ नीचे जरूर रहे, लेकिन द्वितीय वरीयता की गिनती में उनका बढ़त बन गई और विपक्षी उम्मीदवारों को पीछे छोड़ दिया।

लाल बिहारी यादव ने जीत के बाद बताया कि यह सफलता राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व और पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत का नतीजा है। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन के विरोध के बावजूद शिक्षक वर्ग ने मजबूती से सपा का समर्थन किया।

उन्होंने आगे कहा कि यह परिणाम 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अच्छा संकेत है क्योंकि यह दिखाता है कि शिक्षक वर्ग और बौद्धिक लोग वर्तमान सरकार से नाखुश हैं और बदलाव चाहते हैं।

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