कोलकाता भगदड़ में 19 मौतें: छाती दबने और पसलियां टूटने से जान गई

कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भीषण भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई। यह घटना सप्तमी की शाम को हुई जब अचानक भारी भीड़ उमड़ी और मुक्ताराम बाबू स्ट्रीट के पास भगदड़ मची। इस हादसे में 13 महिलाएं और दो बच्चे (5 और 13 साल के) शामिल हैं। यह दुखद घटना कई परिवारों के लिए बड़ी त्रासदी बन गई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासे

कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और NRS मेडिकल कॉलेज में किए गए पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में बताया गया कि मरने वालों की मौत मुख्य रूप से ‘ट्रॉमेटिक एस्फिक्सिया’ यानी सांस रुकने की वजह से हुई। भगदड़ के दौरान छाती पर अत्यधिक दबाव की वजह से सांस लेने में दिक्कत हुई और अंततः मौत हो गई। कई पीड़ितों की पसलियां टूट गईं और कुछ टूटे हुए हड्डियां फेफड़ों में भी चली गईं।

पोस्टमार्टम में यह भी पाया गया कि बच्चों की मौत के दौरान उनके शरीर पर कोई बड़ी बाहरी चोट नहीं थी, लेकिन उनके सांस रुक जाने से उनकी जान गई। डॉक्टरों ने बताया कि आठ बच्चों समेत कम से कम 19 का दम घुट गया था। इसके अलावा कुछ पीड़ितों के सिर पर गंभीर चोटें भी पाई गईं, जो भगदड़ के कारण गिरने या टकराने से हुई थीं।

भीड़ प्रबंधन में लापरवाही के आरोप

इस हादसे के बाद लगभग 45 घायल लोग कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल पहुंचाए गए। घायलों में कई ने सांस लेने में तकलीफ के बारे में शिकायत की। पुलिस ने भगदड़ होने के पीछे भीड़ नियंत्रण में कमी को देखते हुए पूजा समिति के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया है।

राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा की है और घटना की गहराई से जांच के आदेश दिए हैं। शवों का अंतिम पोस्टमार्टम जारी है, जो जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह दुखद घटना इस साल के सबसे बड़े सामूहिक दुर्घटनाओं में से एक है और इससे सुरक्षा उपायों को सुधारने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है। पूजा आयोजक और प्रशासनिक अधिकारियों से भीड़ प्रबंधन सुनिश्चित करने की उम्मीद की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों।

पुलिस अधिकारी और स्थानीय प्रशासन लगातार जांच कर रहे हैं ताकि पता लगाया जा सके कि भगदड़ कहाँ और कैसे इतनी तेजी से फैली। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने लोगों के दिलों को झकझोर दिया है और मृतकों के परिवारों के लिए राहत एवं पुनर्वास की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। सामाजिक संगठनों ने भी सरकार से संवेदनशीलता दिखाने की अपील की है।

रवि भूतड़ा, अनुभवी पत्रकार, ने इस रिपोर्ट के माध्यम से इस घटना की गहराई से पड़ताल की है, जिससे यह दुखद दुर्घटना सार्वजनिक चेतना में बनी रहे और भविष्य में सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाएं।

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