पुणे में भारतीय जनता पार्टी के नेता किरीट सोमैया ने विपक्ष के जोरदार विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने इस विरोध को राजनीतिक ड्रामा और देश में अराजकता पैदा करने की साजिश करार दिया। उन्होंने खासतौर पर कांग्रेस पर तीखा हमला किया और चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों को बेबुनियाद बताया।
कांग्रेस और एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल
किरिट सोमैया ने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने वहां एक लाख बूथ एजेंट नियुक्त करने थे, लेकिन आधे से भी कम 50,000 एजेंट ही लगाए। एसआईआर के दौरान मतदाता पंजीकरण में कांग्रेस की भागीदारी नगण्य रही। उन्होंने अपनी बात जारी रखते हुए विपक्ष को चुनौती दी कि वे बताएं कि चुनाव आयोग पर लगाई जा रही धांधली के कौन-कौन से फर्जी वोटर कटे हैं। खासतौर पर कितने बांग्लादेशी और मुस्लिम वोटरों के नाम हटाए गए हैं, इसकी सूची सार्वजनिक करें।
उन्होंने कहा, “अब विपक्ष को यह डर होने लगा है कि 2019 के चुनाव में धांधली के कारण वे जीत नहीं पाएंगे। इसलिए वे इस तरह का प्रदर्शन कर रहे हैं। वे खुद को राजनीति में बनाए रखने के लिए गलत सूचना फैला रहे हैं।”
इमरान खान और मालेगांव मामलें पर बयान
भाजपा नेता ने बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान के मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इमरान खान ने चुनाव आयोग को अतिरिक्त साक्ष्य दिए और कहा कि जनता की आवाज दबाई जा रही है। किन्तु पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। किरीट सोमैया ने स्पष्ट किया कि इमरान खान कोई राजनीतिक व्यक्ति नहीं हैं और उचित कार्रवाई कर उनके बाहर जाने का इंतजार होगा।
मालेगांव में भी उन्होंने एक लाख मतदाताओं के नाम कटने की बात कही, जिनमें आधे नाम मतदाता सूची में थे, लेकिन लोग वहां उपस्थित नहीं थे। यह घटना कांग्रेस और एसआईआर के विरोध करने वालों की असलियत जनता के सामने ला रही है।
किरिट सोमैया ने कहा कि विपक्ष अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने लिए ऐसे आरोप लगा रहा है जो सच नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा लोकतंत्र की रक्षा के लिए सक्रिय है और धोखाधड़ी के खिलाफ कड़े कदम उठाएगी।
उन्होंने कांग्रेस को दोहराया कि आरोप लगाने से पहले सभी तथ्यों को सार्वजनिक करना चाहिए। मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। यही लोकतंत्र का आधार है।
सोमैया ने अंत में स्पष्ट किया कि भाजपा चुनाव आयोग के कामकाज पर कोई सवाल नहीं उठाती, परंतु गलत आरोपों से प्रक्रिया को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं। उन्होंने कहा कि सत्य के साथ ही लोकतंत्र मजबूत होता है और जनता इसका जागरूक पक्ष है।
