दिल्ली में आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा के डिटेंशन को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने नेहा बोरा की तुरंत रिहाई की मांग करते हुए पुलिस और राष्ट्रीय महिला आयोग से मामले की जांच करने को कहा है। उन्होंने कहा कि उनका पता नहीं लगना एक गंभीर मामला है।
नेहा बोरा की गिरफ्तारी और स्थिति
अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि एक महिला को रात में डिटेन करना और उसके ठिकाने की जानकारी न देना गैरकानूनी और अमानवीय है। उन्होंने पुलिस से यह भी पूछा कि नेहा बोरा को कहां ले जाया गया है। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने CJP चीफ अभिजीत दिपके को भी राजधानी में किसी सुरक्षित स्थान पर रखा है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की योजना बना रही है।
नेहा बोरा को हिरासत में लिए जा चुके छह घंटे से अधिक समय हो चुका है, लेकिन उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। इस बात ने उनके समर्थकों और अन्य प्रभावितों में चिंता बढ़ा दी है।
प्रतिनिधिमंडल की मांग और पुलिस का रुख
नेहा बोरा की रिहाई की मांग को लेकर सांसद मार्ग थाने के बाहर आइसा, लेफ्ट नेता एनी राजा और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा। पुलिस ने थाने के बाहर बैरिकेडिंग कर दी थी और प्रतिनिधिमंडल को थाने के अंदर जाने से रोका। सभी सदस्य पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर बैरिकेड हटाने की मांग कर रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि ‘लहरा दो तिरंगा मार्च’ के दौरान नेहा बोरा को प्राइवेट गाड़ी में डिटेन किया गया था, जिसमें कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी। वे इस मामले में पुलिस की निष्पक्ष जांच चाहते हैं।
नए दिल्ली के डीसीपी से मिलने के बाद भी प्रतिनिधिमंडल को नेहा बोरा के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। उन्होंने कहा कि यदि जानकारी नहीं मिलती है तो वे गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराने के लिए भी थाने आए हैं। इसके बावजूद पुलिस के अधिकारी उनसे बातचीत के लिए तैयार नहीं हैं। वे लगातार नेहा बोरा की रिहाई की मांग करते रहेंगे।
नेहा बोरा की गुमशुदगी इस मामले को और गंभीर बनाती है, जिससे सभी पक्ष चिंता में हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग से भी इस विषय में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की गई है।
इस प्रकरण ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कई सामाजिक और राजनीतिक circles में इस मामले को लेकर विरोध और समर्थन दोनों ही जारी हैं। नेहा बोरा के समर्थक कहते हैं कि उनका हिरासत में रहना बिना सूचना और बिना कारण है, जबकि पुलिस की ओर से इस पर आधिकारिक बयान अभी तक नहीं आया है।
यह मामला आने वाले दिनों में उत्तरप्रदेश और दिल्ली की राजनीति में भी बहस का विषय बना रहेगा। समाचार एजेंसियां इस मुद्दे पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और जैसे ही कोई नई जानकारी मिलेगी, उसका अपडेट दिया जाएगा।
