दिल्ली प्रदर्शन प्रतिबंध मामले में गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त माफी दी

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में प्रदर्शन प्रतिबंध मामले में गृह मंत्रालय, दिल्ली पुलिस आयुक्त और दिल्ली मेट्रो रेल निगम को अवमानना नोटिस जारी किया था। इसके जवाब में गृह सचिव ने कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगी। इसके बाद पीआईबी-गृह मंत्रालय ने इस प्रक्रिया को लेकर अपनी सफाई दी है।

गृह मंत्रालय की सफाई

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवमानना नोटिस जारी होने पर जवाबी हलफनामे में बिना शर्त माफी देना अनिवार्य होता है। यह प्रक्रिया हर अवमानना याचिका में अपनाई जाती है ताकि अन्य तथ्य और तर्क प्रस्तुत किए जा सकें। गृह सचिव और अन्य अधिकारियों के हलफनामे में इस नियम का पालन किया गया है।

मंत्रालय ने कहा कि इस नियम का पालन करते हुए दायर हलफनामे के पहले पैराग्राफ में माफी मांगी गई है, जबकि शेष भाग में विस्तृत जवाब प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया करार दिया।

सरकार का विरोध प्रदर्शन के दौरान कदमों का बचाव

केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में बताया कि कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 10 अक्टूबर को आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान मध्य दिल्ली के कुछ इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवा अस्थायी रूप से बंद कराना आवश्यक था। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि यह कोई जानबूझकर आदेश उल्लंघन नहीं था।

मंत्रालय के مطابق, सभी कदम कानून के अंतर्गत और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उपयुक्त थे। उन्होंने अदालत से अवमानना नोटिस को रद्द करने का अनुरोध किया।

गृह मंत्रालय ने कहा कि इंटरनेट सेवाओं का अस्थायी निलंबन सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जरूरी था। यह निर्णय मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार उचित और वैध था, जिसका मकसद संभावित दंगे और अव्यवस्था को रोकना था।

वहीं, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से इस तरह के मामलों में इंटरनेट निलंबन को लेकर आदेश में संशोधन की मांग की है। उन्होंने कहा कि कानून और वैधानिक सुरक्षा उपायों के अनुकरण में ऐसे कदम उठाने की अनुमति दी जाए।

इस मामले में गृह सचिव गोविंद मोहन मुख्य प्रतिनिधि हैं, जिन्होंने कोर्ट में सभी आवश्यक स्पष्टीकरण दिए हैं। सरकार का तर्क है कि इस घटना को लेकर किसी भी प्रकार की अनदेखी या जानबूझकर उल्लंघन का सवाल नहीं है।

यह मामला दिल्ली में प्रदर्शन और प्रतिबंध के बीच संतुलन बनाए रखने के प्रशासनिक निर्णयों की संवेदनशीलता को दर्शाता है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी जवाबदेही पूरी की है और प्रशासनिक कार्रवाई को उचित ठहराया है।

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