उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड की सुनवाई के बाद अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। यह फैसला जिला जज अरविंद कुमार ने सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दिया। यह मामला पूरे प्रदेश और देश में काफी चर्चा में रहा था।
नीले ड्रम हत्याकांड का मुकदमा
करीब डेढ़ साल की लंबी सुनवाई के बाद इस केस में अदालत ने दोषी ठहराया। अभियोजन पक्ष ने इस दौरान 22 गवाहों के बयान दर्ज करवाए, जिनमें हत्या में इस्तेमाल चाकू और नीले ड्रम की खरीद से जुड़ी गवाहियां शामिल थीं। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर मुस्कान और साहिल को सजा-ए-मौत सुनाई।
19 मार्च 2025 को पुलिस ने मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जांच में पता चला कि हत्या के बाद मृतक सौरभ के शव को टुकड़ों में बांट कर उसे नीले ड्रम में रखा गया था। इस घटना ने पूरे देश में सनसनी फैला दी थी।
इस हत्या का मामला जुलाई 2025 में अदालत में शुरू हुआ। 13 महीने की जांच के दौरान कुल 126 तारीखों पर सुनवाई हुई। अदालत ने 30 सितंबर को दोनों को दोषी घोषित कर सजा सुनाई।
भारत में आखिरी बार फांसी
भारत में आखिरी बार 20 मार्च 2020 को चार दोषियों को फांसी दी गई थी। यह दुष्कर्म व हत्या का मामला दिल्ली का था, जिसमें 16 दिसंबर 2012 को एक युवा पैरामेडिकल छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी गई थी। चारों दोषियों को तिहाड़ जेल में सुबह पांच बजकर तीस मिनट पर फांसी दी गई।
मुस्कान और साहिल को सजा का तुरंत क्रियान्वयन नहीं होगा। भारत में सत्र अदालत की मौत की सजा हाई कोर्ट से पुष्टि के बाद ही लागू होती है। दोषियों के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील और अन्य कानूनी विकल्प भी उपलब्ध हैं। इसलिए अभी उनकी फांसी की तारीख तय नहीं हुई है।
यह मामला मेरठ के नीले ड्रम हत्याकांड के रूप में विशेष रूप से याद रखा जाएगा। अदालत के फैसले ने इस हत्या कांड को एक न्यायिक अंत दिया है। आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।
प्रदेश के कानूनी विशेषज्ञ इस फैसले को बड़ी न्यायिक कार्रवाई मान रहे हैं। पुलिस और न्याय व्यवस्था की मेहनत से इस जटिल मामले में उचित सजा मिली है। अब इंतजार है हाई कोर्ट के आदेश और अपील की प्रक्रियाओं का।
