AI का कमाल: सॉफ्टवेयर और टूल्स से फिर जिंदा हो रहीं ‘स्वर्ण भारत’ की पौराणिक कथाएं

90 के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले रामायण और महाभारत जैसे सीरियलों ने भारतीय दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी। अपने भव्य सेट और उम्दा अभिनय के कारण यह धारावाहिक पूरे देश तक लोकप्रिय हुए। लेकिन समय के साथ टीवी पर पौराणिक कथाओं की चमक धीरे-धीरे फीकी पड़ने लगी। इसका मुख्य कारण महंगे बजट और वीएफएक्स तकनीक की उच्च लागत थी।

एनिमेटेड पौराणिक कथाओं का नया युग

आज की आधुनिक तकनीक ने इस क्षेत्र में क्रांति ला दी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे स्वर्ण भारत टीवी (SBTV) तथा अन्य यूट्यूब चैनल भारत की सांस्कृतिक गाथाओं को बिना भारी बजट में नए रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। इन प्लेटफॉर्म्स ने लाखों दर्शकों को पौराणिक कथाओं से जोड़ा है, जो पहले मुश्किल था।

यूट्यूब इंडिया की गुंजन सोनी का कहना है कि स्मार्ट एआई टूल्स ने डिजिटल कंटेंट बनाना बहुत आसान कर दिया है। उन्होंने बताया कि केवल एक साल में 2 लाख से अधिक भारतीय यूट्यूब चैनल्स ने मॉनेटाइजेशन हासिल किया है। विशेष रूप से Midjourney, Runway और Sora जैसे एआई सॉफ्टवेयर ने महंगे वीएफएक्स प्रोडक्शन का विकल्प प्रदान किया है।

वॉयस और संगीत में भी नई क्रांति

Augmentables AI जैसे यूट्यूब चैनल पर रामायण और महाभारत पर उच्च गुणवत्ता वाली 4K एनिमेटेड सीरीज बन रही हैं। एआई की मदद से युद्ध के दृश्य इतने यथार्थवादी लगते हैं कि दर्शक स्वयं उस माहौल का हिस्सा महसूस करते हैं। इसके साथ ही वॉयस एआई टूल्स भी भारी आवाजें तैयार कर रहे हैं, जिसे पहले पेशेवर वॉयस आर्टिस्ट ही कर पाते थे।

नवी मुंबई से शुरू हुआ स्वर्ण भारत टीवी एआई तकनीक से भारतीय इतिहास और पौराणिक कथाओं को खूबसूरत विजुअल के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। इसने कम समय में लाखों सब्सक्राइबर जोड़ लिए हैं और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का काम कर रहा है।

स्वर्ण भारत टीवी के फाउंडर अश्विन राय का कहना है कि उनकी कोशिश है कि तकनीक का इस्तेमाल कर पुरानी कहानियों की आत्मा और संदेश को कायम रखा जाए। यही कारण है कि उनकी प्रस्तुतियों में कथाएं प्रभावशाली और दिलचस्प बनी रहती हैं।

इसके अतिरिक्त, पारंपरिक वाद्ययंत्रों जैसे शंख, डमरू की धुनें भी एआई के जरिये तैयार की जा रही हैं, जो दर्शकों को कहानी में पूरी तरह डुबो देती हैं। इस तरह का संगीत पिछली तकनीकों के मुकाबले बहुत अनोखा अनुभव प्रदान करता है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और ओटीटी वीडियो सेवाओं ने भी एआई तकनीक को अपनाना शुरू कर दिया है। इससे प्रोडक्शन की लागत घटकर लगभग 90% तक आ गई है। पहले जिन परियोजनाओं पर महीनों और करोड़ों रुपये खर्च होते थे, वह अब असरदार और किफायती तरीके से संभव हो पाती हैं।

अश्विन राय कहते हैं, “हमारा उद्देश्य सिर्फ कंटेंट बनाना नहीं, बल्कि लोगों को सांस्कृतिक जागरूकता देना और सोच समझकर जीना सिखाना है।” इस नई तकनीक और मीडिया के संयोग से भारत की पौराणिक कथाएं फिर से नई ऊर्जा से जीवंत हो रही हैं।

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