जॉब मार्केट के मुताबिक नहीं हो रही पढ़ाई: नीति आयोग की रिपोर्ट

आज का युवा जब अपने करियर की तैयारी करता है, तो वह ऐसे वर्कप्लेस के लिए तैयार हो रहा है जो नौकरी मिलने तक पूरी तरह बदल सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और नई इंडस्ट्रीज काम के तरीके बदल रही हैं। नई नौकरियां उभर रही हैं और मौजूदा जॉब्स में चाहिए स्किल्स भी बदल रही हैं। इसलिए शिक्षा सामग्री को केवल जानकारी देने से बढ़कर, छात्रों को उस जानकारी के व्यावहारिक उपयोग की भी समझ देनी होगी।

नीति आयोग की रिपोर्ट में शिक्षा और रोजगार के बीच का फासला

नीति आयोग की रिपोर्ट ‘Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047’ के अनुसार 15 से 29 साल के लगभग 8.7 करोड़ युवा न तो शिक्षा में हैं, न रोजगार या प्रशिक्षण में। यह स्थिति उस लेबर मार्केट की ओर इशारा करती है जहां शिक्षा योग्यता हमेशा नौकरी की मांगों से मेल नहीं खाती। अधिकतर ग्रेजुएट अपनी डिग्री के अनुरूप नौकरी पाने में असमर्थ हैं, जो शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर बल देता है।

रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ डिग्री हासिल करना अब नौकरी के लिए पर्याप्त नहीं रहा। स्किल सेट का होना भी जरूरी है, खासकर उन कौशलों का जो बदलते काम की प्रकृति और तकनीकों के अनुरूप हों।

पाठ्यपुस्तकों और शिक्षण सामग्री में बदलाव जरूरी

दिशा पब्लिकेशन के डायरेक्टर अविनाश अग्रवाल कहते हैं कि पारंपरिक किताबें अब केवल जानकारी प्रदान करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। छात्र डिजिटल और AI टूल्स से तुरंत स्पष्टीकरण पा सकते हैं। इसीलिए अब शिक्षा सामग्री में संदर्भ, संरचना, अभ्यास और मार्गदर्शन को भी शामिल करना आवश्यक है। एक प्रभावी शिक्षण संसाधन छात्रों को समस्याओं का समाधान खोजने और विभिन्न परिप्रेक्ष्यों में अवधारणाओं को लागू करना सिखाता है।

नीति आयोग की रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि मिडिल स्कूल से ही शिक्षा में उद्यमिता कौशल, टीमवर्क, वित्तीय समझ, समस्या समाधान और डिजिटल कौशल शामिल होनी चाहिए। ये कौशल केवल पढ़ाई से नहीं, अभ्यास और सही वातावरण से विकसित होते हैं।

इस दिशा में, प्रिंटेड किताबों और डिजिटल प्लेटफॉर्म दोनों की भूमिका अहम रहती है। जहां भौतिक पुस्तक का आधार बना रहना जरूरी है, वहीं अतिरिक्त डिजिटल सामग्री जैसे वीडियो, आकलन, व्यक्तिगत अभ्यास, संदेह समाधान और AI-आधारित सहायता से सीखने का अनुभव बेहतर किया जा सकता है।

अगस्त प्रकाशन के अनुसार, हर छात्र की आवश्यकताएं अलग होती हैं, इसलिए व्यक्तिगत शिक्षा माहिर ज़रूरी है। एक ही चैप्टर पढ़ने वाले दो छात्रों की समझ अलग-अलग हो सकती है, इसलिए सामग्री को उनकी जरूरतों के अनुसार अनुकूलित करना चाहिए।

टेक्नोलॉजी की भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह छात्रों को उनकी कमजोरियों का पता लगाने में मदद करती है और बताती है कि कौन-सी चीजें उन्हें फिर से दोहरानी चाहिए। इस तरह की संसाधन योजनाएं सिर्फ जानकारी ट्रांसफर नहीं करतीं, बल्कि सीखने की यात्रा की गुणवत्ता बढ़ाती हैं। इसका मतलब यह भी है कि विश्वसनीय और विषय के जानकारों द्वारा समीक्षा किए गए कंटेंट की मांग बढ़ेगी।

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