New Delhi, Delhi
भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक बहस अब नए वोटरों के पंजीकरण तक पहुंच गई है। विवाद का केंद्र Form 6 के साथ जोड़ी गई वह अतिरिक्त घोषणा है, जिसमें आवेदक से उसके, माता-पिता या दादा-दादी के नाम पिछली SIR मतदाता सूची में होने के बारे में जानकारी मांगी गई।
Form 6 का इस्तेमाल पहली बार मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए किया जाता है। निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पात्र नागरिक मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं।
क्या है विवाद?
Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने इस व्यवस्था पर आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों का सवाल था कि यदि Form 6 निर्धारित नियमों के तहत एक वैधानिक आवेदन है, तो उसमें नई शर्त जोड़ने के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
इसके बाद निर्वाचन आयोग ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि Form 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया। आयोग के मुताबिक, SIR से संबंधित जानकारी के लिए एक अलग घोषणा को Form 6 के साथ जोड़ा गया था।
14 आपत्तियों ने बढ़ाई चर्चा
मामला तब और चर्चा में आया जब रिपोर्ट में दावा किया गया कि संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की। इन आपत्तियों में Form 6 के अलावा मतदाता सूची से नाम हटाने, नए मतदाताओं के नाम जोड़ने और चुनावी डेटा के प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए।
निर्वाचन आयोग ने हालांकि किसी आंतरिक मतभेद के दावे को खारिज किया। आयोग की ओर से कहा गया कि SIR समेत सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।
SIR का बड़ा संदर्भ
SIR की प्रक्रिया के तहत कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों की समीक्षा की गई। रिपोर्ट के अनुसार, 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए।
अब बहस इस बात पर है कि पिछली मतदाता सूची से परिवार का लिंक मांगने की प्रक्रिया नए मतदाताओं के लिए कितनी आसान या कठिन होगी और इससे मतदाता पंजीकरण पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
