नई दिल्ली, भारत
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में देश में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को अधिक प्रभावी और नेटवर्क-केंद्रित बनाने पर जोर दिया गया। सम्मेलन में स्पष्ट किया गया कि केवल ड्रग्स की बरामदगी या छोटे स्तर के तस्करों की गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिए। तस्करी के पीछे काम कर रहे पूरे नेटवर्क की पहचान कर उसे खत्म करना और गिरोहों के सरगनाओं के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई करना जरूरी है।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की ओर से 22 और 23 सितंबर को आयोजित सम्मेलन का समापन हो गया। इसके बाद गुरुवार को जारी बयान में सम्मेलन में हुई चर्चाओं और आगे की रणनीति की जानकारी दी गई।
सरगनाओं और संगठित नेटवर्क पर फोकस
सम्मेलन में संगठित ड्रग्स तस्करी नेटवर्क के खिलाफ मुकदमा चलाने की रणनीति पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने माना कि केवल नशीले पदार्थों को जब्त करने से तस्करी के पूरे कारोबार को खत्म नहीं किया जा सकता।
तस्करी नेटवर्क के पीछे मौजूद प्रमुख लोगों की पहचान, उनके संचालन तंत्र की जानकारी और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई गई। इस रणनीति का उद्देश्य तस्करी के नेटवर्क को उसकी जड़ तक जाकर कमजोर करना है।
इसके लिए विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने और बेहतर समन्वय की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
राज्यों को भी बनाना होगा अपना रोडमैप
एनसीबी के अनुसार, राज्यों को केंद्र सरकार द्वारा तैयार तीन वर्षीय रोडमैप की तर्ज पर अपने-अपने राज्य स्तरीय रोडमैप तैयार करने के लिए प्रेरित किया गया है।
राज्य स्तर के रोडमैप का उद्देश्य स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार ड्रग्स की समस्या से निपटने की रणनीति तैयार करना है। इसके तहत तस्करी के संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, नेटवर्क की निगरानी, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय और तस्करी गिरोहों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया जा सकता है।
अमित शाह ने किया था उद्घाटन
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को सम्मेलन का उद्घाटन किया था। इस दौरान उन्होंने मादक पदार्थों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।
एनसीबी के बयान के अनुसार, शाह ने कहा कि नशीले पदार्थों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का समय आ गया है और यह देश तथा दुनिया के सामने मौजूद गंभीर खतरों में से एक है।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2029 तक देश को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। कुछ महीने पहले अमित शाह ने इस लक्ष्य को लेकर नेशनल विजन डॉक्यूमेंट जारी किया था।
नशामुक्त भारत के लक्ष्य पर जोर
सरकार की रणनीति में राज्यों की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क की प्रकृति अलग हो सकती है। ऐसे में राज्य स्तर पर तैयार किए जाने वाले रोडमैप को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप लागू करने पर जोर दिया जा रहा है।
सम्मेलन का मुख्य संदेश यह रहा कि मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई केवल बरामदगी और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं होनी चाहिए। तस्करी के पूरे नेटवर्क, उसके प्रमुख संचालकों और संगठित ढांचे को निशाना बनाकर कार्रवाई करना जरूरी है।
एनसीबी के सम्मेलन में सामने आई रणनीति के अनुसार, आने वाले समय में केंद्र और राज्यों की एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के साथ ड्रग्स तस्करी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूत किया जाएगा। इसका उद्देश्य नशीले पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला को कमजोर करना और वर्ष 2029 तक देश को नशामुक्त बनाने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ना है।
