अमेरिकी प्रतिबंध बिल पर चीन का कड़ा विरोध, रूस से व्यापार में तीसरे देश की दखलंदाजी मंजूर नहीं

बीजिंग, चीन

चीन ने रूस से तेल और गैस खरीद को लेकर अमेरिका की प्रस्तावित प्रतिबंध नीति का कड़ा विरोध किया है। चीन ने अमेरिकी ‘लांग-आर्म ज्यूरिस्डिक्शन’ को खारिज करते हुए कहा कि दूसरे देशों के साथ उसके सामान्य व्यापार और आर्थिक सहयोग में किसी तीसरे पक्ष को हस्तक्षेप करने या दबाव बनाने का अधिकार नहीं है।

रूसी तेल और गैस खरीद पर टैरिफ का विरोध

चीन का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका रूस पर प्रतिबंधों को और कड़ा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। चीन ने स्पष्ट किया कि रूस समेत अन्य देशों के साथ उसका सामान्य व्यापार और आर्थिक सहयोग वैध है और इसमें किसी बाहरी देश की दखलंदाजी स्वीकार नहीं की जाएगी।

चीनी पक्ष ने अमेरिकी ‘लांग-आर्म ज्यूरिस्डिक्शन’ की नीति पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कोई भी देश अपने घरेलू कानूनों को दूसरे देशों के सामान्य व्यापारिक संबंधों पर थोपने की कोशिश नहीं कर सकता।

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने पारित किया बिल

अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026’ पारित किया है। प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने और रूस के प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार दिए जाने की बात कही गई है।

इसमें भारत और चीन जैसे देशों पर भी संभावित टैरिफ का प्रावधान चर्चा में है, क्योंकि दोनों देशों के रूस के साथ महत्वपूर्ण व्यापारिक संबंध हैं।

चीन ने जताई आपत्ति

चीन का कहना है कि वैश्विक व्यापार और आर्थिक सहयोग में देशों को अपने हितों के अनुसार सामान्य व्यापारिक संबंध बनाए रखने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। बीजिंग ने संकेत दिया है कि किसी तीसरे देश की ओर से दबाव डालकर उसके व्यापारिक फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश स्वीकार्य नहीं होगी।

रूस से ऊर्जा खरीद चीन के लिए महत्वपूर्ण व्यापारिक संबंधों में शामिल है। ऐसे में अमेरिका की प्रस्तावित प्रतिबंध नीति पर चीन की आपत्ति दोनों देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक तनाव को और बढ़ा सकती है।

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