उज्जैन, मध्य प्रदेश
तीन दिवसीय युवा धर्म संसद में देशभर से जुटे युवा, धर्म, युवा शक्ति और बदलते भारत की चुनौतियों पर करेंगे विचार-विमर्श
उज्जैन में आयोजित तीन दिवसीय युवा धर्म संसद में देशभर से आए करीब 1200 युवा धर्म, युवा शक्ति और बदलते भारत से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत शुक्रवार को इस आयोजन का विधिवत शुभारंभ करेंगे। आयोजन में युवाओं को देश की सामाजिक, सांस्कृतिक और विकास से जुड़ी चुनौतियों पर संवाद का मंच उपलब्ध कराया जा रहा है।
सेवाज्ञ संस्थानम् की ओर से आयोजित युवा धर्म संसद की शुरुआत गुरुवार से हुई। पहले दिन देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे युवाओं ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे। इस दौरान चयनित 16 युवाओं ने युवा पंचायत में हिस्सा लिया और धर्म, युवा शक्ति तथा बदलते भारत की चुनौतियों समेत कई विषयों पर अपनी बात रखी।
युवाओं की भूमिका पर होगा मंथन
आयोजन का प्रमुख उद्देश्य युवाओं को विभिन्न सामाजिक और राष्ट्रीय विषयों पर विचार रखने का अवसर देना है। युवा पंचायत के दौरान प्रतिभागियों ने बदलते सामाजिक परिवेश में युवाओं की भूमिका और देश के विकास में उनकी भागीदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
आयोजकों के अनुसार, युवा शक्ति को सकारात्मक दिशा देकर उसे राष्ट्र और समाज के विकास का माध्यम बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। तीन दिवसीय कार्यक्रम में संवाद, विचार-विमर्श और विभिन्न विषयों पर वक्ताओं के विचार शामिल हैं।
शुक्रवार को इन विषयों पर होगी चर्चा
शुक्रवार को ‘निरंकुश संवाद-पद्धति तथा सूचना एवं विचार का संघर्ष’ विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इस सत्र में आध्यात्मिक वक्ता आचार्य पुंडरीक गोस्वामी महाराज, मां सद्विद्यानंद, दैनिक जागरण-नईदुनिया समूह के कार्यकारी संपादक विष्णु प्रकाश त्रिपाठी और भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) इंदौर के निदेशक प्रो. हिमांशु राय अपने विचार रखेंगे।
इस सत्र में सूचना के बढ़ते प्रभाव, विचारों के संघर्ष और संवाद के बदलते तरीकों जैसे विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है। डिजिटल दौर में सूचना तेजी से लोगों तक पहुंच रही है, ऐसे में युवाओं के बीच सही जानकारी, विचार और संवाद की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है।
1200 युवाओं की भागीदारी
युवा धर्म संसद में करीब 1200 युवाओं की भागीदारी बताई गई है। देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों को धर्म, संस्कृति, समाज और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर संवाद का अवसर मिल रहा है।
शुक्रवार को डॉ. मोहन भागवत के हाथों होने वाला विधिवत शुभारंभ इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहेगा। इसके बाद तीन दिवसीय कार्यक्रम में युवाओं और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के बीच विचारों का आदान-प्रदान जारी रहेगा।
युवा धर्म संसद के जरिए युवाओं को अपनी बात रखने और बदलते भारत की चुनौतियों पर गंभीर चर्चा करने का मंच मिल रहा है। आयोजकों का जोर युवाओं की ऊर्जा और क्षमता को सकारात्मक दिशा देने तथा उन्हें समाज और देश के विकास में सक्रिय भूमिका के लिए प्रेरित करने पर है।
