नई दिल्ली, दिल्ली
अचानक लगी चोट के बाद टिटनेस के इंजेक्शन को लेकर लोगों में काफी भ्रम रहता है। खासकर पैर में कील चुभने, जंग लगी धातु से कटने, सड़क पर गिरने या बच्चों के खेलते समय त्वचा छिल जाने पर परिवार अक्सर बिना किसी जांच के टिटनेस का इंजेक्शन लगवाने का फैसला कर लेते हैं। हालांकि चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार हर चोट में टिटनेस का इंजेक्शन जरूरी नहीं होता। इसका फैसला चोट की प्रकृति और पहले हुए टीकाकरण के आधार पर किया जाता है।
टिटनेस एक गंभीर और संभावित रूप से जानलेवा बीमारी है। यह Clostridium tetani बैक्टीरिया के बीजाणुओं से होती है, जो मिट्टी, धूल और जानवरों के मल सहित पर्यावरण में मौजूद रह सकते हैं। ये बीजाणु कटे या खुले घाव के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इसके बाद बनने वाला टॉक्सिन मांसपेशियों में जकड़न और दर्दनाक ऐंठन पैदा कर सकता है। जबड़े में जकड़न इसकी पहचान में से एक है, जिसके कारण इसे “लॉकजॉ” कहा जाता है।
कब लग सकता है बूस्टर?
मौजूदा मार्गदर्शिकाओं के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को टिटनेस के टीके की कम से कम तीन खुराक मिल चुकी हैं और घाव साफ व मामूली है, तो बूस्टर आमतौर पर तब दिया जाता है जब आखिरी खुराक को 10 साल या उससे ज्यादा समय बीत गया हो। वहीं गंदे या गंभीर घाव में 5 साल से ज्यादा समय बीतने पर बूस्टर की जरूरत पड़ सकती है।
गंभीर या जोखिम वाले घावों में छेद वाली चोट, मिट्टी या मल से दूषित घाव, मृत ऊतक वाला घाव और कुछ प्रकार के गहरे घाव शामिल हो सकते हैं। ऐसे मामलों में केवल वैक्सीन ही पर्याप्त है या नहीं, यह टीकाकरण इतिहास और घाव की स्थिति देखकर डॉक्टर तय करते हैं।
किन लोगों को ज्यादा सावधानी?
जिन लोगों को टिटनेस का टीकाकरण पूरा नहीं हुआ है, जिनकी पिछली खुराक की जानकारी नहीं है या जिनका रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, उनमें अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है। दूषित और गंभीर घाव वाले कुछ मरीजों को वैक्सीन के अलावा टिटनेस इम्यून ग्लोब्युलिन भी दिया जा सकता है।
घाव की सफाई भी जरूरी
टिटनेस से बचाव में सिर्फ इंजेक्शन ही महत्वपूर्ण नहीं है। चोट लगने के बाद घाव को अच्छी तरह साफ करना और मिट्टी, गंदगी या मृत ऊतक हटाना भी जरूरी माना जाता है।
इसलिए अगली बार चोट लगने पर घबराकर खुद से इंजेक्शन लेने के बजाय पहले अपना वैक्सीनेशन रिकॉर्ड देखें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें।
