परवाणू, हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश में श्रावण अष्टमी मेलों और सप्ताहांत की छुट्टियों के कारण सड़कों पर वाहनों का दबाव काफी बढ़ गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के धार्मिक स्थलों की ओर जाने और पर्यटकों के पहाड़ी क्षेत्रों में पहुंचने से कई प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। सोलन जिले के परवाणू टोल प्लाजा से लेकर ऊना-चिंतपूर्णी मार्ग तक वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं।
परवाणू टोल प्लाजा पर स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण रही। पंजाब सीमा से सटे इस इलाके में बड़ी संख्या में वाहन हिमाचल में प्रवेश कर रहे थे। वाहनों की संख्या बढ़ने के कारण टोल प्लाजा पर लंबी कतार लग गई और यात्रियों को करीब 35 से 40 मिनट तक अतिरिक्त समय लगने की जानकारी सामने आई।
श्रावण अष्टमी मेले से बढ़ा धार्मिक ट्रैफिक
इन दिनों श्रावण अष्टमी मेलों के कारण चिंतपूर्णी में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पंजाब के होशियारपुर और आसपास के इलाकों से श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने के कारण होशियारपुर-चिंतपूर्णी मार्ग पर वाहनों का दबाव लगातार बना हुआ है।
चिंतपूर्णी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है और बड़े पर्वों के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में सड़क पर निजी वाहनों और अन्य यातायात साधनों की संख्या बढ़ जाती है।
श्रद्धालुओं के इस अतिरिक्त दबाव के बीच सप्ताहांत होने से पर्यटकों की संख्या भी बढ़ गई। दोनों तरह के ट्रैफिक के एक साथ बढ़ने से प्रमुख सड़कों पर यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई।
परवाणू में टोल प्लाजा पर लगी कतार
परवाणू हिमाचल में प्रवेश करने वाले प्रमुख मार्गों में से एक है। सप्ताहांत पर यहां पहले से ही पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है। श्रावण अष्टमी के कारण धार्मिक यात्रियों की आवाजाही बढ़ने से दबाव और ज्यादा हो गया।
टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतार लगने के कारण यात्रियों को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक समय देना पड़ा। करीब 35 से 40 मिनट की देरी ने लोगों की यात्रा को प्रभावित किया।
कई वाहन चालक जाम खुलने का इंतजार करते रहे। वाहनों की लंबी कतार का असर आसपास के मार्गों पर भी पड़ा।
चिंतपूर्णी और ऊना में भी हालात चुनौतीपूर्ण
ऊना जिले में होशियारपुर-चिंतपूर्णी मार्ग पर भी यातायात का दबाव बढ़ा रहा। धार्मिक यात्रा के लिए आने वाले वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी के कारण कई स्थानों पर यातायात धीमा रहा।
चिंतपूर्णी की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं के अलावा कांगड़ा और आसपास के पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले वाहन भी सड़कों पर थे। इससे मार्गों पर वाहनों की संख्या और बढ़ गई।
लंबे जाम का सबसे अधिक असर उन यात्रियों पर पड़ा जिन्हें निर्धारित समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचना था। कई लोगों की यात्रा में घंटों की देरी हुई।
कांगड़ा जाने वालों को भी जाम का सामना
कांगड़ा की ओर जाने वाले यात्रियों को भी कई जगह यातायात की परेशानी हुई। सप्ताहांत पर कांगड़ा और आसपास के पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले वाहनों की संख्या सामान्य से अधिक रही।
धार्मिक और पर्यटन दोनों प्रकार की आवाजाही के कारण सड़कों पर लगातार दबाव बना रहा। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क की क्षमता सीमित होने के कारण अधिक वाहनों के एक साथ आने पर जाम की स्थिति जल्दी बन जाती है।
पुलिस व्यवस्था भी दबाव में
यातायात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से व्यवस्था की गई थी, लेकिन वाहनों की संख्या काफी बढ़ जाने से कई स्थानों पर प्रबंधन मुश्किल हो गया।
पुलिसकर्मियों को यातायात सुचारू करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़े। इसके बावजूद कुछ स्थानों पर वाहनों की कतार लंबी होती चली गई।
यह स्थिति पर्यटन और धार्मिक सीजन में हिमाचल के सामने आने वाली चुनौती को दिखाती है। त्योहारों और लंबे सप्ताहांत के दौरान वाहनों की संख्या सामान्य से कई गुना बढ़ सकती है।
प्रशासन के सामने आगे की चुनौती
श्रावण अष्टमी मेलों के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी रहने की संभावना है। इसके अलावा पर्यटन सीजन के कारण सप्ताहांत पर हिमाचल की ओर आने वाले पर्यटकों की संख्या भी अधिक रहती है।
ऐसे में प्रशासन को प्रमुख प्रवेश मार्गों, टोल प्लाजा और धार्मिक स्थलों की ओर जाने वाली सड़कों पर अतिरिक्त यातायात व्यवस्था करनी होगी। जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक मार्गों और यातायात डायवर्जन का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
यात्रियों के लिए भीड़भाड़ वाले समय में यात्रा की योजना पहले से बनाना और यातायात की स्थिति की जानकारी लेकर निकलना जरूरी होगा।
फिलहाल श्रावण अष्टमी और वीकेंड के संयुक्त प्रभाव ने हिमाचल की सड़कों पर यातायात का दबाव काफी बढ़ा दिया है। परवाणू से लेकर चिंतपूर्णी और कांगड़ा तक जाम की स्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि धार्मिक और पर्यटन सीजन के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर अतिरिक्त तैयारी की जरूरत है।
