नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने दहेज हत्या के एक मामले में बीएसएफ के एक कर्मचारी को बड़ी राहत देते हुए उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले में उपलब्ध तथ्यों और रिकॉर्ड को देखते हुए आरोपी के खिलाफ कार्यवाही जारी रखना न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने बीएसएफ कर्मचारी की अपील स्वीकार करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के दिसंबर 2025 के आदेश को रद्द कर दिया। हाई कोर्ट ने इससे पहले आरोपी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही समाप्त करने से इनकार कर दिया था।
2016 में मेरठ में दर्ज हुआ था मामला
यह मामला वर्ष 2016 में उत्तर प्रदेश के मेरठ में दर्ज किया गया था। बीएसएफ कर्मचारी के खिलाफ दहेज हत्या से जुड़े आरोप लगाए गए थे। मामला आगे बढ़ने के बाद आरोपी ने आपराधिक कार्यवाही को खत्म करने की मांग की।
जब हाई कोर्ट से उसे राहत नहीं मिली तो उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े कई दस्तावेज और परिस्थितियां सामने रखी गईं।
बीएसएफ कमांडेंट का प्रमाण पत्र बना अहम
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बीएसएफ बटालियन के कमांडेंट की ओर से जारी प्रमाण पत्र पर विशेष रूप से गौर किया। प्रमाण पत्र में कहा गया था कि घटना से संबंधित अवधि में अपीलकर्ता आधिकारिक ड्यूटी पर था।
दस्तावेज के अनुसार, बीएसएफ कर्मचारी सरकारी कार्य के सिलसिले में मेरठ से बाहर तैनात था। अदालत ने इस तथ्य को मामले के अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड के साथ देखा।
घटना के समय आरोपी की मौजूदगी से संबंधित यह दस्तावेज मामले की सुनवाई में महत्वपूर्ण रहा। हालांकि, अदालत ने केवल इसी तथ्य के आधार पर नहीं बल्कि पूरे मामले की परिस्थितियों और रिकॉर्ड को देखते हुए अपना निष्कर्ष दिया।
माता-पिता पहले ही हो चुके थे बरी
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि मामले में आरोपी के माता-पिता को पहले ही बरी किया जा चुका है। पीठ ने मामले के अन्य पहलुओं पर भी विचार किया।
अदालत ने घटना से जुड़े कमरे और दरवाजे की स्थिति को लेकर अभियोजन पक्ष से सवाल किए। पीठ ने यह जानने की कोशिश की कि उपलब्ध परिस्थितियां अभियोजन के मामले को किस तरह प्रभावित करती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने उपलब्ध सामग्री को समग्र रूप से देखने के बाद माना कि बीएसएफ कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।
कोर्ट ने बताया न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग
पीठ ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए आरोपी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारी की अपील स्वीकार कर ली और इलाहाबाद हाई कोर्ट के दिसंबर 2025 के आदेश को रद्द कर दिया।
इसके साथ ही कर्मचारी के खिलाफ दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही भी समाप्त हो गई।
बीएसएफ जवान को मिली बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से बीएसएफ कर्मचारी को दहेज हत्या के मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। मामले में अदालत के सामने उसकी आधिकारिक ड्यूटी से संबंधित प्रमाण पत्र, माता-पिता के पहले ही बरी होने और घटनास्थल की परिस्थितियों सहित कई तथ्यों पर विचार किया गया।
शीर्ष अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि इस मामले में आपराधिक कार्यवाही को आगे बढ़ाना उचित नहीं है। इसी के साथ लंबे समय से चल रही कार्यवाही पर विराम लग गया।
