गुटखा कारोबारी पर जीएसटी विभाग की बड़ी कार्रवाई, 317 करोड़ की टैक्स-पेनाल्टी; 12 संपत्तियां हो सकती हैं कुर्क

दुर्ग, छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में राज्य जीएसटी विभाग ने गुटखा कारोबारी गुरमुख जुमनानी के खिलाफ बड़ी वसूली कार्रवाई की है। विभाग ने कारोबारी पर 317 करोड़ रुपये की टैक्स और पेनाल्टी निर्धारित करते हुए आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार, इस रकम को 90 दिन के भीतर जमा करना होगा। तय समय में भुगतान नहीं होने पर विभाग कारोबारी के मालिकाना हक वाली 12 चिह्नित संपत्तियों को कुर्क कर वसूली कर सकता है।

जुलाई 2025 में फैक्ट्रियों पर हुई थी कार्रवाई

राज्य जीएसटी विभाग की टीम ने जुलाई 2025 में गुरमुख जुमनानी से जुड़ी दुर्ग जिले की जोरातराई और गनियारी स्थित फैक्ट्रियों पर छापा मारा था। इस दौरान विभागीय अधिकारियों ने उत्पादन, पैकिंग और सप्लाई से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की।

जांच में सामने आया कि फैक्ट्रियों में ‘सितार’ नाम से गुटखा की पैकिंग की जाती थी। इसके बाद तैयार उत्पाद को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में सप्लाई किए जाने की जानकारी विभाग को मिली।

जांच के दौरान पैकिंग की प्रक्रिया से जुड़े कामकाज की भी जानकारी सामने आई। बताया गया कि फैक्ट्री में गुटखा पैकिंग का काम सुबह सात बजे से रात 10 बजे तक किया जाता था। पैकिंग के लिए मजदूरों को छिंदवाड़ा से लाए जाने की बात भी जांच में सामने आई।

बेटे की फैक्ट्री में भी पहुंची जांच टीम

जुलाई 2025 की कार्रवाई के बाद जीएसटी विभाग ने जांच का दायरा बढ़ाया। विभाग की टीम ने कारोबारी के बेटे सागर जुमनानी की राजनांदगांव स्थित कोमल फूड फैक्ट्री में भी जांच की।

विभाग की ओर से की गई जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अब 317 करोड़ रुपये की टैक्स और पेनाल्टी की वसूली का आदेश जारी किया गया है। आदेश में निर्धारित राशि जमा करने के लिए 90 दिन की समयसीमा दी गई है।

रकम नहीं दी तो संपत्तियों पर होगी कार्रवाई

विभाग के आदेश के अनुसार, यदि कारोबारी तय समय में 317 करोड़ रुपये की राशि जमा नहीं करता है तो वसूली के लिए 12 चिह्नित संपत्तियों को कुर्क किया जा सकता है।

इस कार्रवाई के बाद गुटखा कारोबार और टैक्स अनुपालन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। राज्य जीएसटी विभाग की ओर से की गई यह कार्रवाई बड़ी टैक्स वसूली के मामलों में शामिल हो गई है।

फिलहाल आदेश के बाद कारोबारी के सामने तय समय में राशि जमा करने का विकल्प है। इसके अलावा, कानून के तहत उपलब्ध अपील या अन्य कानूनी उपायों का सहारा लिया जा सकता है।

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