निवाड़ी, मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने करीब 11 साल पुराने हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे मुख्य आरोपी राजेंद्र यादव और उसके दोनों बेटों सत्येंद्र यादव तथा जितेंद्र यादव को दोषमुक्त कर दिया है। इस मामले में सबसे अहम पहलू यह रहा कि आरोपी जितेंद्र यादव घटना के समय झांसी के अस्पताल में भर्ती था। इसके बावजूद उसने करीब 10 साल छह महीने जेल में बिताए।
हाई कोर्ट ने अपीलों पर सुनवाई के दौरान अभियोजन की कहानी, गवाहों के बयान, मेडिकल रिकॉर्ड और घटनाक्रम से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच की। अदालत को अभियोजन के मामले में कई महत्वपूर्ण विसंगतियां मिलीं। पांच घायल गवाहों की मेडिकल रिपोर्ट रिकॉर्ड में मौजूद होने के बावजूद अभियोजन पक्ष उन्हें अदालत में विधिवत साबित नहीं कर सका।
13 नवंबर 2015 को हुई थी घटना
अभियोजन के मुताबिक, 13 नवंबर 2015 को निवाड़ी जिले में राजेंद्र यादव अपने बेटों सत्येंद्र यादव और जितेंद्र यादव तथा तीन अज्ञात लोगों के साथ परमानंद यादव के घर पहुंचा था। आरोप था कि आरोपियों के पास लाइसेंसी बंदूक, तलवार, फरसा और लाठी जैसे हथियार थे।
अभियोजन का आरोप था कि आरोपियों ने परमानंद यादव और उसके परिवार के सदस्यों पर हमला किया। हमले में परमानंद यादव की मौत हो गई, जबकि परिवार के अन्य लोग घायल हुए।
मामले की सुनवाई के बाद निवाड़ी की अदालत ने राजेंद्र यादव और उसके दोनों बेटों को विभिन्न धाराओं में दोषी माना और तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
हाई कोर्ट में उठे कई सवाल
सजा के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने शिकायतकर्ता और अन्य गवाहों के बयानों की जांच की। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों में कई महत्वपूर्ण विरोधाभास हैं।
पीठ ने यह भी पाया कि पांच घायल गवाहों की मेडिकल रिपोर्ट रिकॉर्ड पर मौजूद होने के बावजूद अभियोजन उन्हें अदालत में विधिवत साबित नहीं कर सका। इससे अभियोजन के मामले की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े हुए।
घटना के समय अस्पताल में था जितेंद्र
मामले में जितेंद्र यादव के संबंध में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य उसके अस्पताल में भर्ती होने का था। बचाव पक्ष की ओर से यह बताया गया कि घटना के समय जितेंद्र झांसी के अस्पताल में भर्ती था।
यदि घटना के समय उसकी मौजूदगी अस्पताल में थी, तो अभियोजन की उस कहानी पर सवाल उठता है जिसमें उसे घटनास्थल पर मौजूद आरोपियों में शामिल बताया गया था।
हाई कोर्ट ने इस तथ्य को भी मामले के अन्य साक्ष्यों और परिस्थितियों के साथ देखा। अदालत ने किसी एक साक्ष्य के बजाय पूरे मामले का समग्र मूल्यांकन किया।
तीनों को किया दोषमुक्त
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने अभियोजन की कहानी में पाई गई विसंगतियों और साक्ष्यों की कमियों को देखते हुए तीनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
फैसले के बाद राजेंद्र यादव, सत्येंद्र यादव और जितेंद्र यादव को बड़ी कानूनी राहत मिली है।
इस मामले में जितेंद्र यादव का करीब 10 साल छह महीने जेल में रहना विशेष रूप से उल्लेखनीय है, क्योंकि बचाव पक्ष के अनुसार घटना के समय वह अस्पताल में भर्ती था। हाई कोर्ट के फैसले ने आपराधिक मामलों में साक्ष्यों की विश्वसनीयता, गवाहों के बयानों की निरंतरता और अभियोजन द्वारा दस्तावेजों को विधिवत साबित करने के महत्व को रेखांकित किया है।
