कावेरी विवाद: थंजावुर में उदयनिधि ने DMK का नेतृत्व किया प्रदर्शन, सीएम विजय को ‘अक्षम’ कहा

तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु: जनता की गहरी चिंता का विषय बना कावेरी जल विवाद मंगलवार को फिर एक बार सुर्खियों में रहा, जब DMK ने थंजावुर में जोरदार प्रदर्शन का आयोजन किया। इस दौरान पार्टी के युवा नेता उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय को निशाने पर लेते हुए उन्हें ‘अक्षम’ करार दिया।

DMK ने कर्नाटक सरकार द्वारा प्रस्तावित मेकेडेटु बैलेंसिंग रिज़र्वायर परियोजना को तत्काल रोकने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि इस परियोजना से तमिलनाडु के किसानों व क्षेत्रीय जल संसाधनों पर भारी विपरीत प्रभाव पड़ेगा। इस वजह से, DMK ने किसानों के कर्ज़ माफ करने तथा डेल्टा जिलों को सूखा प्रभावित क्षेत्र घोषित करने की भी मांग उठाई है।

उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि कर्नाटक का यह प्रोजेक्ट तमिलनाडु के कृषि जीवन को खतरे में डाल रहा है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि राज्य सरकार को किसानों के हितों की रक्षा के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए। प्रदर्शन में शामिल हजारों समर्थकों ने बैनर और नारे के माध्यम से सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की।

वहीं, विपक्षी दल के इस वार ने तमिलनाडु की राजनीतिक सत्ता में खलबली मचा दी है। मुख्यमंत्री विजय सरकार पर यह दबाव बढ़ा है कि वे जल विवादों के समाधान के लिए ठोस नीति अपनाएं और किसानों को राहत दें।

कृषि समुदाय के प्रतिनिधियों का कहना है कि मेकेडेटु प्रोजेक्ट यदि लागू हुआ तो डेल्टा क्षेत्र की जल उपलब्धता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा जिससे फसल उत्पादन घटेगा और क्षेत्र में पर्यावरणीय संकट उत्पन्न होगा। कृषि मजदूरों और किसानों ने भी अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं और सरकार से तत्काल बचाव की मांग की है।

इस संदर्भ में, DMK ने केंद्र सरकार से भी हस्तक्षेप करने का आह्वान किया है ताकि तमिलनाडु के हितों की रक्षा हो सके। शिवसेना और अन्य राजनीतिक पार्टियों ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिससे स्पष्ट होता है कि कावेरी विवाद अब केवल एक जल संकट नहीं, बल्कि राजनीति का बड़ा विषय बन चुका है।

सरकार की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन उम्मीद है कि जल विवाद की इस स्थिति को लेकर जल्द ही कोई सकारात्मक पहल होगी। किसानों और क्षेत्रवासियों की उम्मीदें इस दिशा में काफी बड़ी हैं क्योंकि इस परियोजना का प्रत्यक्ष प्रभाव उनके जीवन यापन से जुड़ा है।

उत्तराखंड, कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच जल विवाद लंबे समय से चला आ रहा है और यह मुद्दा समय-समय पर तूल पकड़ता रहा है। इस बार DMK द्वारा थंजावुर में आयोजित प्रदर्शन ने इस विषय को फिर से सामने ला दिया है और आगामी समय में राजनीतिक हलचल और भी तेज होने की संभावना है।

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