अकाली दल ने पंजाब सरकार के कर्मचारियों के प्रति विरोधी रवैए का किया खुलासा

चंडीगढ़, पंजाब। शिरोमणि अकाली दल (सिअद) ने सोमवार को पंजाब सरकार के कर्मचारियों के प्रति विरोधी रवैये को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने सरकारी कर्मचारियों से अपना समर्थन जताने की अपील करते हुए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश का स्वागत किया, जिसमें सरकार को 15 दिनों के भीतर 14,191 करोड़ रुपए का महंगाई भत्ता (डीए) बकाया भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।

अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने मीडिया से बातचीत में बताया कि कोर्ट में सरकार ने कर्मचारियों के हितों के खिलाफ पक्ष रखा है और इस मामले में सरकार ने कर्मचारियों को डीए के लाभ से वंचित रखने के लिए कई बहाने बनाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने हरपाल चीमा, अमन अरोड़ा और बलजीत कौर की तीन सदस्यीय समिति गठित की थी, जिसने यह रिपोर्ट दी कि राज्य के कर्मचारियों को अतिरिक्त डीए देने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि उनका लाभ केंद्र सरकार की तुलना में बेहतर है।

मजीठिया ने यह भी कहा कि समिति ने यह तर्क दिया कि पंजाब आर्थिक संकट से गुजर रहा है और डीए संशोधन मामले में वह केंद्र सरकार का अनुसरण करने के लिए बाध्य नहीं है। इस पूरे तर्क को कोर्ट में रिकॉर्ड कर दिया गया है, जबकि सरकार ने सार्वजनिक रूप से इससे विपरीत बयान दिए हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह राज्य की आर्थिक प्रगति का दावा करते हैं, लेकिन वही बात अदालत में नकार दी गई है। सरकार के अपने बयान में माना गया है कि अधिकांश खर्च वेतन, पेंशन, ऋण किश्तों तथा सब्सिडी पर हो रहा है, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति कमजोर है।

पूर्व कैबिनेट मंत्री मजीठिया ने कहा कि सरकार के बावजूद अदालत के आदेश के तहत डीए का बकाया भुगतान करने की कोई ठोस योजना नहीं दिख रही है। सोमवार को सरकार ने अदालत से किश्तों में भुगतान की अनुमति मांगने का प्रयास किया।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार बड़े पैमाने पर विज्ञापन, सार्वजनिक कार्यक्रम एवं मंत्रियों की विदेश यात्राओं पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। उदाहरण स्वरूप, मंत्री हरजोत बैंस को बिना राजनीतिक मंजूरी के सरकारी खर्च पर विदेशी दौरे के लिए यात्रा भत्ता दिया जा रहा है। इसी तरह पंजाब सरकार प्रधानमंत्री अरविंद केजरीवाल को चार्टर्ड विमानों से यात्रा कराने में भी करोड़ों रुपए खर्च करती रही है, जबकि ये संसाधन सीधे तौर पर कर्मचारियों के कल्याण में लगाए जा सकते थे।

अकाली दल इस मामले में सरकार से कर्मचारियों के अधिकारों के प्रति सहानुभूति दिखाने और कोर्ट के आदेशों का पालन करने की कड़ी मांग करता है। पार्टी ने कर्मचारियों से कहा है कि वे अपने हितों के लिए सक्रिय हों और अपने हक के लिए आवाज उठाएं।

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