पंजाब विधानसभा की महत्वपूर्ण पहल: युवाओं के भविष्य के लिए बार-बार पेपर लीक के खिलाफ सर्वसम्मति प्रस्ताव पारित

चंडीगढ़, पंजाब। पंजाब विधानसभा ने सोमवार को एक सर्वसम्मति से निंदा प्रस्ताव पास किया जिसमें देश में बार-बार पेपर लीक की घटनाओं की कड़ी निंदा की गई। यह मामला शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है, जिससे करोड़ों छात्रों के सपनों को बड़ा झटका लगा है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के कार्यकाल में पेपर लीक की घटना बहुत बार हुई है, जिससे छात्रों का मनोबल टूट गया है। उन्होंने यह भी बताया कि न्याय की मांग करने वाले छात्रों और अभिभावकों को पुलिस की कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें आंसू गैस के गोले और पैलेट गन का उपयोग किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार इस प्रस्ताव को प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय को भेजेगी ताकि केंद्र सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग की जा सके। इसका उद्देश्य देश की शिक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार और पेपर लीक की घटनाओं को रोकना है।

मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने प्रस्ताव पर बहस के दौरान सदन से वॉकआउट करके विरोध जताया। इसके बावजूद सदन में मुख्यमंत्री ने बताया कि देश को “विश्वगुरु” बनाने का दावा करने वाली सरकारें इन पेपर लीक की घटनाओं को रोकने में असफल रही हैं। इसके परिणामस्वरूप नीट परीक्षा के 22 उम्मीदवारों ने आत्महत्या कर ली है।

उन्होंने कहा कि 2014 से अब तक देश में 93 बार पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं, जिनमें से 65 घटनाएं 2019 से 2024 के बीच हुईं। अधिकतर मामले उन राज्यों में हुए जहां भाजपा की सरकार थी, जैसे राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश आदि।

मुख्यमंत्री ने यह भी चिंता जताई कि शिक्षा व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करते हुए राजनीतिक हितों के लिए स्कूलों के सिलेबस में बदलाव हो रहा है। छात्रों द्वारा केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे की मांग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार की सख्त जरूरत है।

उन्होंने केंद्र सरकार पर छात्रों के खिलाफ आंसू गैस, पैलेट गन आदि का उपयोग करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। विश्वभर में पैलेट गन पर रोक है, लेकिन भारत में इसका गलत उपयोग हो रहा है।

पेट्रोलियम मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस समस्या के समाधान के बजाय फास्ट-ट्रैक कोर्ट की बातें करके जनता को भ्रमित किया है। रक्षा बलों की मदद लेकर परीक्षा कराने का यह तरीका केवल सिस्टम का मजाक है।

उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार वरिष्ठ जांच एजेंसियों जैसे सीबीआई द्वारा जांच के आदेश दिए जाते हैं, लेकिन फैसले और सजा दुर्लभ हैं। यह सब केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। प्रधानमंत्री के फास्ट-ट्रैक कोर्ट के लिए आश्वासन के बावजूद किसी ठोस कदम की उम्मीद कम ही लगती है।

इस प्रस्ताव के पारित होने से उम्मीद जताई जा रही है कि केंद्र सरकार भी इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान देगी और भविष्य में पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए कठोर कदम उठाएगी, जिससे देश के युवा छात्रों का उज्जवल भविष्य सुनिश्चित किया जा सकेगा।

Source

error: Content is protected !!