शिमला/भोपाल। कांग्रेस नेता कुलदीप राठौर ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल समाप्त करने के घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पूर्व में जिस व्यक्ति को सरकार और भाजपा के नेता “चीन का एजेंट” घोषित कर रहे थे, वही सोनम वांगचुक के अनशन को समाप्त कराने के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को सामने आना पड़ा। यह कदम सरकार की मजबूरी और मौजूदा स्थिति पर नियंत्रण पाने की जरूरत को दर्शाता है।
कुलदीप राठौर ने बताया कि नीट पेपर लीक मामले के चलते आंदोलनरत छात्र अब भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से इस मांग का समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि यह मांग सिर्फ छात्रों की नहीं है बल्कि देश के शिक्षा तंत्र और न्याय व्यवस्था की भी आत्मा की आवाज है।
राठौर ने आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागना लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मामले में कार्रवाई होनी चाहिए और छात्रों के साथ किए गए दुर्व्यवहार में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए। इससे पहले छात्रों की आवाज दबाने का यह स्पष्ट उदाहरण है, जो देश के युवाओं के भविष्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाल के वीडियो संदेश का जिक्र करते हुए कुलदीप राठौर ने सुझाव दिया कि यदि सरकार ने नए कानून का मसौदा तैयार कर लिया है, तो विपक्ष को पूरी जानकारी देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर संदेश भेजने की बजाय संसद में इस विषय पर विस्तृत चर्चा होना चाहिए, ताकि सभी राजनीतिक दलों की राय सामने आ सके और एक साझा समाधान निकाला जा सके। यह कदम लोकतंत्र के हित में होगा और युवाओं में भरोसा बढ़ाएगा।
इसी तरह, मध्य प्रदेश की कांग्रेस नेता शोभा ओझा ने भी केंद्र सरकार पर कड़ी टिप्पणियाँ की हैं। उन्होंने पेपर लीक के घटनाक्रम को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की पुनः मांग की। ओझा ने कहा कि देश के छात्र-छात्राओं के साथ अन्याय हो रहा है जिससे शिक्षा प्रणाली में विश्वास कम होता जा रहा है। उनके अनुसार, छात्रों के साथ पुलिस का व्यवहार अत्यंत कठोर रहा है और इस दौरान कानून-व्यवस्था के नाम पर छात्रों के अधिकारों का हनन हुआ है।
शोभा ओझा ने कहा कि सरकार को छात्र आंदोलन की गंभीरता को समझना होगा और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने बताया कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा प्रणाली को लेकर नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए है। सरकार को सुनी गई आवाजों का सम्मान करना चाहिए और उचित समाधान पर काम करना चाहिए ताकि शिक्षा व्यवस्था विश्वसनीय और पारदर्शी बनी रहे।
