चंडीगढ़, पंजाब। फाज़िल्का जिले के 58 वर्षीय मनजीत सिंह ने कई सप्ताह तक अपने सीने में हो रही तकलीफ़ को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर दिया। लेकिन जब दर्द बार-बार होने लगा और थोड़ी दूर चलने पर भी बेचैनी महसूस हुई, तो उन्होंने तुरंत चिकित्सकीय जांच कराई। जांच में पता चला कि उनकी हृदय की एक कोरोनरी धमनी में रुकावट है और तत्काल उपचार की जरूरत है। मनजीत सिंह को कुछ ही घंटों में कैथेटराइजेशन लैब ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने एंजियोप्लास्टी कर स्टेंट डालकर उनके हृदय में रक्त प्रवाह को सामान्य किया।
मनजीत सिंह का केस समय पर इलाज के महत्व को दर्शाता है। साथ ही, आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि हृदय रोग अब युवाओं को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 17 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं ने कैशलेस हृदय उपचार का फायदा उठाने वाले मरीजों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी ली है। यह बढ़ती जागरूकता और विशेषज्ञ हृदय चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता का स्पष्ट संकेत है।
हृदय रोग आमतौर पर अचानक नहीं आता बल्कि इसके कई लक्षण होते हैं जैसे लगातार सीने में दर्द, सांस फूलना, असामान्य थकान, या दर्द का हाथ, जबड़े या पीठ तक फैलना। चिकित्सक कहते हैं कि इन संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है और समय पर इलाज जीवन रक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
भारत में इस समस्या का दायरा बढ़ रहा है। इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन दशकों में हृदय और रक्तवाहिका संबंधी रोग देश में मृत्यु के प्रमुख कारण बन चुके हैं। तेजी से बढ़ता शहरीकरण, निष्क्रिय जीवनशैली, असंतुलित खानपान, तंबाकू सेवन, डायबिटीज और उच्च रक्तचाप जैसी स्थिति इसे और गंभीर बनाती हैं। हालांकि चिकित्सा क्षेत्र में हुई प्रगति से इलाज में सफलता मिली है, लेकिन उपचार की महंगी लागत कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
मनजीत सिंह जैसे मरीजों के सामने सबसे बड़ी बाधा आर्थिक होती है। पंजाब के कई परिवार जो हृदय आपातकाल का सामना करते हैं, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत बिना आर्थिक बोझ के समय पर उपचार पा रहे हैं। यह योजना पात्र मरीजों के हृदय उपचार की पूरी लागत वसूलती है, जिससे इलाज में देरी नहीं होती।
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी, पंजाब के आंकड़ों के अनुसार, 15 जुलाई 2026 तक मुख्यमंत्री सेहत योजना के अंतर्गत 135 मरीजों को कैशलेस हृदय उपचार प्रदान किया गया है, जिन पर कुल 2.71 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इनमें जन्मजात हृदय दोष, हृदय वाल्व विकार और अन्य जटिल रोगों की सर्जरी शामिल हैं। ये आंकड़े खास तौर पर विशेषज्ञ हृदय सेवाओं की जरूरत को दर्शाते हैं और साथ ही आर्थिक सहायता के महत्व को प्रमाणित करते हैं।
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि हृदय रोग आज एक गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती है, लेकिन जागरूकता बढ़ाने, समय पर जांच कराने और इलाज करवाने से मौतें रोकी जा सकती हैं। उन्होंने जनता से आग्रह किया है कि वे लगातार हो रहे सीने के दर्द, सांस फूलने या असामान्य थकान जैसे संकेतों को नजरअंदाज न करें।
उन्होंने कहा, “किसी भी परिवार को आर्थिक तंगी के कारण जीवनरक्षक उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए। मुख्यमंत्री सेहत योजना के जरिए हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हर पात्र मरीज को इलाज की चिंता किए बिना गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा मिले।”
मोहाली के माय अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. करनदीप सिंह सयाल ने कहा कि हृदय रोग आज भी देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में है। जन्मजात हृदय दोष और जटिल रोगों की सर्जरी की बढ़ती संख्या इस क्षेत्र की जरूरतों को जताती है। उन्होंने कहा कि आर्थिक मदद मिलने से मरीज उपचार में तेजी से आगे आते हैं और परिणाम बेहतर होते हैं। साथ ही, उन्होंने स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली अपनाने, नियमित व्यायाम, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज नियंत्रण को रोकथाम के सशक्त माध्यम बताया।
आज मनजीत सिंह अपने परिवार के साथ स्वस्थ जीवन जी रहे हैं और इस बात के लिए आभारी हैं कि आर्थिक संकट ने उनके उपचार में बाधा नहीं डाली। उनकी कहानी पंजाब के उन कई परिवारों की है जो मुख्यमंत्री सेहत योजना के अंतर्गत समय पर और उचित हृदय चिकित्सा प्राप्त कर रहे हैं। उनका कहना है, “सबसे बड़ी राहत यह है कि बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होने के साथ-साथ इलाज समय पर मिलने में हमारी आर्थिक स्थिति बाधक नहीं बनती।”
