नई दिल्ली, भारत – भारत सरकार ने सेमिकॉन 2.0 योजना के माध्यम से देश के सेमीकंडक्टर निर्माण क्षेत्र को एक नई ऊँचाई पर ले जाने का संकल्प लिया है। यह योजना इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल फोन उद्योग को बढ़ावा देने के साथ-साथ देश में सेमीकंडक्टर की घरेलू क्षमता स्थापित करने पर केंद्रित है।
सेमिकॉन 2.0 योजना की मुख्य फोकस एरिया में अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों की स्थापना, डिजाइन और आर एंड डी पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके तहत भारत में सेमीकंडक्टर उत्पादन के लिए अनुसंधान को मजबूत करने के साथ-साथ विश्वस्तरीय फैक्ट्रीज लगाने को प्रोत्साहित किया जाएगा।
सेमिकॉन 2.0 की पहली चरण की योजना, जिसका उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना था, के मुकाबले अब इसमें सप्लाई चेन, इकोसिस्टम डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी इनोवेशन पर विशेष जोर दिया गया है। भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करने हेतु बेहतर नीतियाँ और वित्तीय सुविधा उपलब्ध कराई हैं।
भारत सेमीकंडक्टर फोर्जिंग इंडस्ट्री को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठा रहा है, क्योंकि वैश्विक मार्केट में सेमीकंडक्टर चिप्स की डिमांड लगातार बढ़ रही है। सेंसर, मोबाइल, ऑटोमोटिव और आईओटी जैसे क्षेत्र से जुड़ी कई महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजीज में सेमीकंडक्टर की भूमिका निर्णायक है। इसलिए, भारत के लिए यह आवश्यक है कि वह केवल इंपोर्टर न रहकर खुद देश के भीतर यह कम्पोनेंट्स मैन्युफैक्चर कर सके।
मोबाइल फोन निर्माण योजना (Mobile Phone Manufacturing Scheme – M-SIPS) के अंतर्गत मोबाइल फोन निर्माण इकाइयों को कई तरह के प्रोत्साहन दिए जाते हैं, जैसे कैपिटल सब्सिडी, टैक्स में छूट, कॉम्पोनेन्ट उत्पादन प्रोत्साहन, और निर्यात पर अतिरिक्त लाभ। इस योजना का उद्देश्य मोबाइल फोन उद्योग को घरेलू और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। इससे देश में रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए हैं और यह भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने में मदद करता है।
कुल मिलाकर, सेमिकॉन 2.0 भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य न केवल सेमीकंडक्टर के उत्पादन को बढ़ाना है, बल्कि देश को इस क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनाना भी है। सरकार द्वारा दी गई योजनाएं और प्रोत्साहन इसके सफल क्रियान्वयन को सुनिश्चित करेंगे।
