पंजाब: अमेरिकी वीजा धोखाधड़ी मामले में ईडी ने जालंधर की अदालत में चार्जशीट दाखिल की

चंडीगढ़, पंजाब। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अमेरिकी वीजा धोखाधड़ी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जालंधर स्थित विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। यह कदम ईडी द्वारा की गई गहन जांच के बाद उठाया गया है, जिसमें रेड लीफ इमिग्रेशन प्राइवेट लिमिटेड, ओवरसीज पार्टनर और रुद्रा कंसल्टेंसी सर्विसेज को आरोपी बनाया गया है।

अदालत में दायर चार्जशीट में आरोप है कि ये कंपनियां और उनके संचालक वीजा आवेदकों से फर्जी दस्तावेज बनवाकर अमेरिकी छात्र और विजिटर वीजा हासिल करने में उनका सहयोग करते थे। जांच के दौरान यह भी पता चला कि इन कंपनियों द्वारा नकली शैक्षणिक प्रमाणपत्र, अनुभव प्रमाणपत्र, वित्तीय दस्तावेज तथा फर्जी फंड संबंधी प्रमाण प्रस्तुत किए जाते थे।

ईडी अधिकारियों ने बताया कि इस जांच की शुरुआत पंजाब पुलिस और दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर हुई, जिसमें अमेरिकी दूतावास की शिकायतों को एक प्रमुख आधार माना गया। आरोप है कि रेड लीफ इमिग्रेशन के संचालक अमनदीप सिंह और पूनम रानी उन लोगों को निशाना बनाते थे, जो वीजा के लिए आवश्यक शैक्षणिक और वित्तीय योग्यता पूरी नहीं करते थे।

अधिकारियों के अनुसार, उक्त कंपनियां वीजा आवेदकों से बड़ी रकम लेकर फर्जी दस्तावेज, जैसे शैक्षणिक प्रमाण, कार्य अनुभव के कागजात, गेप को छिपाने वाले दस्तावेज तथा अस्थायी फंड की व्यवस्था करती थीं, ताकि वे वीजा के नियमों के तहत मान्य हो सकें। आरोपियों ने विदेशी विश्वविद्यालयों और वीजा अधिकारियों के साथ होने वाले सभी पत्राचार अपने नियंत्रण वाले ईमेल खातों से संचालित किए।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि अंकुर कुमार केहर द्वारा संचालित ओवरसीज पार्टनर ने नितिन विज की रुद्रा कंसल्टेंसी सर्विसेज के साथ मिलकर वीजा आवेदकों के बैंक खातों में अस्थायी धन जमा कर उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत दिखाने का षड्यंत्र रचा। इस प्रकार 154 वीजा आवेदकों को फर्जी फंड का प्रमाण उपलब्ध कराया गया, जिसके लिए लगभग 40 लाख रुपए कई खातों में अस्थायी तौर पर जमा और निकाले गए।

ईडी के अनुसार, इस सेवा के एवज में प्रत्येक आवेदक से लगभग 40 हजार रुपए वसूले गए। साथ ही, कमलजोत कंसल द्वारा संचालित इन्फोविज सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन, जिन लोगों ने कहीं प्रशिक्षण या नौकरी नहीं की थी, उनके लिए फर्जी प्रशिक्षण और अनुभव प्रमाणपत्र बनाती थी। जांच में बरामद डायरी व दस्तावेज इस बात के प्रमाण हैं कि नकद भुगतान लेकर फर्जी रोजगार दस्तावेज बनाए गए।

एफआईआर के बाद फरवरी 2025 में ईडी ने पीएमएलए की धारा 17 के तहत आरोपियों के कई ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, अवैध लेन-देन की डायरियां, 19 लाख रुपए नकद और लगभग 1 किलो सोने की ईंट बरामद हुई।

ईडी की जांच में वीजा धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े धन की भी पुष्टि हुई है, जिसमें लगभग 2.14 करोड़ रुपए की अपराध से अर्जित आय का आकलन किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस चार्जशीट दाखिल होने से मामले की आगे की कार्रवाई तेज होगी और दोषियों को कानूनी सजा दिलाई जाएगी।

यह मामला पंजाब और देश भर में वीजा धोखाधड़ी के खिलाफ एक कड़ी चेतावनी माना जा रहा है, जिससे भविष्य में इस तरह की अपराध प्रवृत्ति को रोकने में मदद मिलेगी।

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