वाराणसी, उत्तर प्रदेश: स्टुति सरीन द्वारा स्थापित मिस्टिसेटी, जो एक वाराणसी आधारित कला समुदाय है, अब बच्चों की पुस्तकों के प्रकाशन क्षेत्र में कदम रख रहा है। ये पहल उनकी नई किताब ‘बापा वांट्स फिश’ के माध्यम से की गई है, जो 1990 के दशक के ओडिशा से प्रेरित एक लिमिटेड एडिशन पुस्तक है।
यह पुस्तक परिवार, भोजन, भावनात्मक लचीलापन और मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों को एक बच्चे के नजरिए से छूती है। सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश को ध्यान में रखते हुए, यह कहानी बच्चों और बड़ों दोनों के लिए समान रूप से आकर्षक और सूचनाप्रद है।
मिस्टिसेटी की स्थापना स्टुति सरीन ने की थी, जिनका उद्देश्य कला के माध्यम से संवेदनशील विषयों को सरलता और प्रभाव शाली तरीके से प्रस्तुत करना है। वाराणसी की इस कला समुदाय ने स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को आधार बनाकर ऐसे प्रोजेक्ट पर काम किया है, जो बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
‘बापा वांट्स फिश’ की कहानी एक बच्चे के दृष्टिकोण से परिवार के बीच के रिश्तों और पारंपरिक भोजन के महत्व को उजागर करती है। किताब में भावनात्मक लचीलापन और मानसिक स्वास्थ्य के बारे में भी महत्वपूर्ण संदेश दिए गए हैं, जो इसे अन्य बच्चों की पुस्तकों से अलग बनाते हैं।
इस पहल के माध्यम से, मिस्टिसेटी बच्चों के लिए ऐसी पुस्तकें प्रस्तुत करना चाहता है जो न केवल मनोरंजन करें बल्कि उनकी मानसिक और भावनात्मक समझ को भी बढ़ावा दें। “हम चाहते हैं कि बच्चे इस किताब के जरिए अपने परिवार और स्वयं की भावनाओं को बेहतर समझ सकें,” स्टुति सरीन ने कहा।
कला और साहित्य के क्षेत्र में इस तरह की रचनात्मक कोशिशें समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। वाराणसी स्थित मिस्टिसेटी जैसे संगठन बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक संबंधों पर चर्चा को प्रोत्साहित करने में मदद कर रहे हैं।
यह पुस्तक लिमिटेड एडिशन में उपलब्ध है और इसे स्थानीय वितरण के साथ-साथ कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी बेचा जा रहा है। पुस्तक प्रकाशन में इस नए कदम से यह आशा की जाती है कि कला समुदाय और बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण सामग्री उपलब्ध हो सकेगी।
