डीप-टेक, एआई और नवाचार भारत के भविष्य का स्वरूप तय करेंगे: Dr. Mashelkar

नई दिल्ली, भारत

भारत को ऐसी नीतियाँ और रणनीतियाँ अपनानी होंगी जो किफायती और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी तकनीकी समाधान प्रदान कर सकें, जिससे देश के करोड़ों लोगों को लाभ पहुंचे। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में भारत की खरीद नीति, जो सबसे कम बोली लगाने वाले को प्राथमिकता देती है, वह तकनीकी प्रगति और देशी नवाचार के लिए सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरी है।

खरीद नीति में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए टेक्नोलॉजी संस्थानों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने कहा कि नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा उसे अपनाने के लिए एक समन्वित और लचीली नीति की जरूरत है। इससे न केवल नई तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारतीय स्टार्टअप्स और शोध संस्थानों को भी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिलेगा।

देश की वर्तमान नीति में सबसे कम बोली पर ही फ़ैसला लिया जाता है, जिससे गुणवत्ता और नवाचार की अनदेखी हो जाती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि मूल्य के साथ-साथ उत्पाद की गुणवत्ता, तकनीकी क्षमता और दीर्घकालिक प्रभाव को भी निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए। इससे कंपनियों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और वे बेहतर उत्पाद और सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रेरित होंगी।

इसके अतिरिक्त, सरकारी योजनाओं और प्रॉक्योरमेंट प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की भी आवश्यकता है ताकि नवाचार को वास्तविक बाजार में अवसर मिल सके। भारत की तकनीकी उत्कर्ष यात्रा के लिए यह आवश्यक है कि नीति निर्धारक इस दिशा में ठोस कदम उठाएं और इन बाधाओं को दूर करें।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भारत अपने शोध और विकास क्षमताओं को सही मायनों में बढ़ावा दे, तो वैश्विक बाजार में उसका दबदबा स्थापित होगा। वे यह भी कहते हैं कि केवल कम लागत वाली वस्तुओं पर ध्यान देने से भारत की तकनीकी प्रगति रुक जाएगी, जबकि नवाचार के रास्ते खोलना जरूरी है ताकि देश आत्मनिर्भर और विकसित हो सके।

इस परिप्रेक्ष्य में, सरकार और उद्योग जगत को मिलकर एक ऐसी समावेशी नीति बनानी होगी जो नवाचार और तकनीकी उत्कृष्टता को बढ़ावा दे और भारत को तकनीकी महाशक्ति बनाने के अपने लक्ष्य के करीब ला सके।

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