अंबाला, हरियाणा।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के नेता जेपी नड्डा ने सोमवार को अंबाला में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रृद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने मुखर्जी को एक कट्टर राष्ट्रवादी, दूरदर्शी शिक्षाविद और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के सपनों का प्रेरक बताया।
जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों और विजनों को साकार किया जा रहा है। उन्होंने इसके तहत अनुच्छेद 370 को समाप्त करना, नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू करना, आत्मनिर्भर भारत अभियान, नए राष्ट्रीय शिक्षा नीति और औद्योगिक विकास को डॉ. मुखर्जी के विचारों का विस्तार बताया।
कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अर्चना गुप्ता सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नड्डा ने कहा कि उन्हें हरियाणा की पावन धरती अंबाला में डॉ. मुखर्जी की जयंती मनाने का अवसर मिला, जो स्वतंत्रता संग्राम के नायक और देश के गौरवशाली क्षेत्र के रूप में विख्यात है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी का योगदान केवल इतिहास नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन है। उन्होंने अपना पूरा जीवन ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के सपने को साकार करने में लगाया।
जेपी नड्डा ने बताया कि डॉ. मुखर्जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष थे, जिन्होंने 21 अक्टूबर 1951 को इस पार्टी की स्थापना की। उन्होंने यह भी कहा कि जिस राजनीतिक विचारधारा के बल पर भारतीय जनसंघ बना, वही विचारधारा आज भाजपा के रूप में सूक्ष्म से विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि भाजपा और इसके नेतृत्व वाले एनडीए देश की लगभग 78 प्रतिशत जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं, और लगभग 72 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में शासन करते हैं।
जेपी नड्डा ने बताया कि डॉ. मुखर्जी भारत की सांस्कृतिक विरासत, आत्मनिर्भरता और देश की एकता एवं अखंडता के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि पार्टी के हर सदस्य को अपने संस्थापक अध्यक्ष के असाधारण परिवार और विरासत पर गर्व महसूस करना चाहिए।
उन्होंने यह कहते हुए सभी को गर्व महसूस करा दिया कि डॉ. मुखर्जी एक साधारण परिवार से नहीं, बल्कि एक ऐसे परिवार से थे जहां उनके पिता डॉ. आशुतोष मुखर्जी कलकत्ता विश्वविद्यालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और कुलपति रह चुके थे।
जेपी नड्डा ने बताया कि डॉ. आशुतोष मुखर्जी ने ब्रिटिश शासन के समय भी भारतीय और ब्रिटिश प्रोफेसरों के वेतन और सुविधाओं में समानता की मांग की थी और भारतीय राष्ट्रवाद की नींव रखी थी। साथ ही उन्होंने भारतीय भाषाओं के विकास को भी बढ़ावा दिया था।
नड्डा ने कहा कि ऐसे महान पिता के पुत्र डॉ. मुखर्जी ने मात्र 33 वर्ष की उम्र में उसी विश्वविद्यालय का कुलपति पद संभाला, जिससे वे उस समय सबसे कम उम्र के कुलपति बने।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों को आगे बढ़ाने की अपील की और कहा कि उनकी शिक्षाएं आज भी भारतीय जनता पार्टी के मूल्यों में जीवित हैं।
