राँणी, केरल। प्रदेश के राँणी क्षेत्र में जंगली हाथियों के हमलों को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन ने एक नई पहल शुरू की है। इस योजना के तहत ड्रोन और जमीनी पेट्रोल की मदद से हाथियों की हरकतों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि क्षेत्र के नाजुक गांवों को समय रहते सतर्क किया जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, हाथी खासकर सीमा पर बसे ग्रामीण इलाकों में अक्सर प्रवेश करते हैं जिससे न केवल फसलों को नुकसान होता है, बल्कि लोगों की जान-माल को भी खतरा उत्पन्न हो जाता है। ऐसे में पूर्व सूचना देना बेहद जरूरी हो जाता है। इसी उद्देश्य से ड्रोन तकनीक का उपयोग कर हाथियों की हरकतों का पता लगाया जा रहा है।
पुलिस और वन विभाग के संयुक्त प्रयास से चलाए जा रहे इस अभियान में ड्रोन की मदद से रात-दिन हाथियों की मूवमेंट को नियमित रूप से मॉनिटर किया जा रहा है। स्थानीय निवासियों को समय-समय पर मोबाइल मैसेज और उन क्षेत्रों में पेट्रोलिंग टीमों द्वारा चेतावनी दी जा रही है। इससे ग्रामीणों को सुरक्षित रहने में मदद मिल रही है और नुकसान की संभावना काफी हद तक कम हो रही है।
वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि इस तकनीकी हस्तक्षेप से पहले हाथियों का पता लगाने पर काफी कठिनाई होती थी जिससे विवाद की स्थिति पैदा होती थी। लेकिन अब ड्रोन के जरिए जल्दी सूचना मिल जाती है और तदनुसार सड़क से गुजरने वाले वाहन और ग्रामीण पंचायत भी चेतन हो जाते हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस प्रकार की तकनीक आधारित निगरानी से न केवल भूंजरकरण का खतरा कम होगा बल्कि हाथियों के क्षेत्र में रहने वाले लोगों का जीवन स्तर भी बेहतर होगा। वन विभाग भविष्य में भी ऐसी hi-tech तकनीकों को और अधिक लागू करने की योजना बना रहा है ताकि वन्यजीवों और मनुष्यों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सके।
इस अभियान के चलते अब तक कई बार हाथियों के समूह को सीमावर्ती इलाकों से हटाया जा चुका है। प्रशासन की उम्मीद है कि यह प्रयास हाथी विवादों को काफी हद तक खत्म कर देगा और क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
