हिमाचल प्रदेश में 18 आईएएस और 16 एचएएस अधिकारियों के बड़े तबादले

शिमला, हिमाचल प्रदेश। सोमवार को हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत 18 आईएएस और 16 एचएएस अधिकारियों का तबादला करते हुए उन्हें नए पदों पर नियुक्त किया है। यह तबादला प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र में नई जान फूंकने के लिए तथा बेहतर कार्य निष्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है।

इस बदलाव के तहत अभिषेक जैन, जो वर्तमान में सलाहकार (नियामक सुधार) और प्रधान सचिव (वित्त एवं योजना) के पद पर थे, को वित्तीय आयुक्त (अपील) का प्रभार सौंपा गया है। वहीं, 2010 बैच के सुदेश मोक्टा को सचिव (सहकारिता) का जिम्मा देकर उनकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण बनाई गई है। अमरजीत सिंह, जो सचिव (सहकारिता) हैं, वह नगर एवं ग्राम योजना तथा गृह विभाग का कार्यभार जारी रखेंगे।

राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड और सामान्य उद्योग निगम के प्रबंध निदेशक तोरुल एस रवीश को निदेशक (भूमि अभिलेख) के पद पर तैनात किया गया है। इसके विपरीत, अभिषेक वर्मा जो पूर्व में निदेशक (भूमि अभिलेख) थे, उन्हें हिमाचल प्रदेश मिल्कफेड का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है। इसी प्रकार, अजय कुमार यादव को हिमाचल प्रदेश चिकित्सा सेवा निगम का प्रबंध निदेशक बनाया गया है।

अन्य महत्वपूर्ण नियुक्तियों में ऊना के अतिरिक्त उपायुक्त महेंद्र पाल गुर्जर को हिमाचल प्रदेश विद्युत पारेषण निगम में निदेशक (कार्मिक एवं वित्त) का पद दिया गया है। सोलन के एडीसी राहुल जैन को महिला विकास निगम सोलन का प्रबंध निदेशक बनाया गया है।

हिमाचल प्रदेश राज्य हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम के प्रबंध निदेशक दिन्यांशु सिंह को अतिरिक्त उपायुक्त सोलन के रूप में नियुक्त किया गया है, जबकि उनके स्थान पर बिलासपुर के अतिरिक्त उपायुक्त ओम कांत शर्मा को यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। मंडी के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट गुरसिमर सिंह को जनरल इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन का प्रबंध निदेशक बनाया गया है। कांगड़ा के एसडीएम ईशांत जसवाल को ऊना का अतिरिक्त उपायुक्त नियुक्त किया गया है।

इसके अतिरिक्त मंडी की एसडीएम रुपिंदर कौर को बिलासपुर का अतिरिक्त उपायुक्त नियुक्त किया गया है, जबकि बिलासपुर के एसडीएम राजदीप सिंह को सोलन का नगर आयुक्त बनाया गया है। इन बड़े तबादलों से प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने तथा सरकारी योजनाओं की प्रभावी कार्यान्वयन की उम्मीद जताई जा रही है।

सरकार के इस कदम को विभिन्न विभागों में दक्षता और उत्तरदायित्व बढ़ाने के लिए आवश्यक माना जा रहा है। अधिकारियों की नई जिम्मेदारियां प्रदेश के विकास कार्यों को गति देने और जनता की सेवा बेहतर तरीके से सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होंगी।

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