सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने टेलीग्राम को पायरेटेड कंटेंट को लेकर ताजा नोटिस जारी किया

नई दिल्ली, भारत

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने टेलीग्राम को पायरेटेड कंटेंट के मामले में ताजा नोटिस जारी किया है। मंत्रालय ने प्लेटफॉर्म को 15 दिनों के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट (Action Taken Report) सौंपने को कहा है। यह नोटिस भारत के आईटी अधिनियम और आईटी नियमों के तहत इंटरमीडियरी की जिम्मेदारी को स्पष्ट करता है।

मंत्रालय का कहना है कि टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग एप्लिकेशन को पायरेटेड, अवैध और कॉपीराइट उल्लंघन करने वाली सामग्री को हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनकी जिम्मेदारी बनेगी, और सरकार द्वारा सख्त कानूनी कार्रवाई संभव है। मंत्रालय के अनुसार, यह कदम डिजिटल मीडिया में बढ़ती अनियंत्रित सामग्री को रोकने के लिए आवश्यक है।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय की आधिकारिक रिपोर्ट में बताया गया है कि टेलीग्राम को पायरेटेड कंटेंट की पहचान कर उसे हटाने और भविष्य में ऐसी सामग्री को साझा न होने देने के लिए प्रभावी तंत्र बनाना है। इसके साथ ही उन्हें उपयोगकर्ताओं की शिकायतों पर त्वरित कार्रवायी करने के निर्देश भी दिए गए। मंत्रालय ने यह भी कहा कि देश के सूचना संरक्षण कानूनों के अनुसार इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म को अपने नियमों और प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करना अनिवार्य है।

बता दें कि टेलीग्राम पिछले कुछ वर्षों में भारत सहित कई देशों में लोकप्रिय हुआ है, लेकिन इसकी पहचानी जाने वाली कमजोरियों के कारण कई बार पायरेटेड और आपत्तिजनक सामग्री तेजी से फैलती रही है। इससे न केवल कॉपीराइट धारकों को नुकसान पहुंचता है, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक और कानूनी सीमाओं का उल्लंघन भी होता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि पायरेसी रोकने के लिए सरकार की यह पहल समय की मांग है। आईटी अधिनियम के तहत प्लेटफॉर्म को जिम्मेदारी देना तकनीकी कंपनियों को और जवाबदेह बनाएगा। इसके साथ ही यह उपयोगकर्ताओं के हितों की सुरक्षा का भी एक महत्वपूर्ण कदम है ताकि वे सुरक्षित और वैध सामग्री का ही उपयोग कर सकें।

अभी तक टेलीग्राम की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन मंत्रालय ने साफ किया है कि रिपोर्ट के समयसीमा के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने डिजिटल मीडिया जगत में जवाबदेही बढ़ाने के लिए कई पहलें की हैं और यह कदम भी उसी रणनीति का हिस्सा है।

नोटिस के अनुसार, टेलीग्राम जैसे एप्लिकेशन को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत इंटरमीडियरी के दायरे में आते हुए नियमों का अनुपालन करना है। इसमें अवैध सामग्री को पहचानना और तुरंत हटाना प्रमुख जिम्मेदारी है। यदि ऐसा न हुआ तो प्लेटफॉर्म को कानून के तहत दंडित किया जा सकता है।

इस पूरे प्रकरण पर लगातार नजर रखने वाले स्रोतों का कहना है कि सरकार डिजिटल नियमों को और सख्त करने की योजना बना रही है ताकि इंटरनेट पर अवांछित सामग्री को रोकना सुनिश्चित किया जा सके। इस दिशा में आने वाले दिनों में और भी कड़े निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

अंततः डिजिटल दुनिया में सुरक्षित और विश्वसनीय माहौल बनाए रखना सूचना और प्रसारण मंत्रालय की प्राथमिकता है। यह कदम न केवल कंटेंट पैटर्न को नियंत्रित करेगा बल्कि यूजर्स के लिए एक सकारात्मक संदेश भी होगा कि कानून के दायरे में इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को काम करना होगा।

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