चंडीगढ़, हरियाणा। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के तत्कालीन वरिष्ठ अकाउंट्स ऑफिसर पर गंभीर आरोपों के बाद गिरफ्तारी की है। यह गिरफ्तारी आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, चंडीगढ़ के सेक्टर 32 शाखा में बोर्ड के खाते से सरकारी फंड के गबन के मामले में हुई है।
सीबीआई की जांच में पता चला है कि आरोपी परवीन कुमार ने बिना किसी विभागीय मंजूरी के एक बैंक खाता चुपके से खुलवाया था। इस खाते का उपयोग धोखाधड़ी से संबंधित लेन-देन के लिए किया गया। जांच एजेंसी ने कहा कि इस खाता खोलने की जानकारी विभाग के अन्य अधिकारियों को नहीं थी, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया।
सीबीआई के सूत्रों के अनुसार, इस खाते से किए गए चेक और डेबिट नोट के माध्यम से बोर्ड के फंड का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया और रकम ऐसी शेल कंपनियों को ट्रांसफर की गई जो आरोपियों द्वारा नियंत्रित थीं। इस प्रक्रिया से हरियाणा सरकार को बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान हुआ है।
रोचक बात यह है कि खाते में परवीन कुमार के सिग्नेचर के अलावा एक अन्य आरोपी का मोबाइल नंबर रजिस्टर था जो कि विभाग में कार्यरत नहीं था। यह कदम धोखाधड़ी को छुपाने के लिए उठाया गया था।
सीबीआई की सक्रियता और साक्ष्यों के आधार पर गुरुवार को परवीन कुमार को गिरफ्तार किया गया। इससे पहले भी सीबीआई ने इस मामले में तीन अन्य सरकारी कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। कुल 25 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिसमें बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी और निजी कंपनियों के सदस्य शामिल हैं।
यह मामला हरियाणा सरकार के आठ विभागों से जुड़ा है जिसमें करीब 504 करोड़ रुपए ऐसे फंड शामिल हैं जो फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट और डेबिट नोट के माध्यम से निकाले गए थे। सीबीआई ने अब तक 17 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है जिसमें बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी, कंपनियां और निजी व्यक्ति शामिल हैं।
सीबीआई इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दावा किया है। हरियाणा सरकार भी इस घोटाले की गंभीरता को समझते हुए जांच में सहायक बनी हुई है। इस घटना से सरकारी धन के संरक्षण और पारदर्शिता की आवश्यकता फिर से उजागर हुई है।
