ऑपरेशन सिंदूर | के.सी. वेणुगोपाल ने संसद में राजनाथ सिंह के ‘गुमराह करने’ पर प्रिविलेज नोटिस दिया

नई दिल्ली, भारत

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने मंगलवार, 30 जून 2026 को लोकसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ प्रिविलेज नोटिस दिया। यह नोटिस वेणुगोपाल ने उस वक्त दिया जब वह यह आरोप लगा रहे थे कि राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर पिछले साल हुई चर्चा के दौरान संसद को गुमराह किया।

वेणुगोपाल ने कहा कि पिछले साल की चर्चा में राजनाथ सिंह ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कोई भी भारतीय सैनिक शहीद नहीं हुआ, जो तथ्यात्मक रूप में गलत है। इस बयान के कारण संसद की गरिमा को ठेस पहुंची है क्योंकि ऐसा लगता है कि रक्षा मंत्री ने जानबूझकर संसद को गलत जानकारी दी है।

ऑपरेशन सिंदूर पर हुई यह बहस पिछले वर्ष महत्वपूर्ण थी क्योंकि सेना की एक उच्च स्तरीय गतिविधि के दौरान सैनिकों की हानि को लेकर कई सवाल उठने लगे थे। विपक्षी दलों ने इस दौरान सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए और सही जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की थी।

लोकसभा में इस प्रिविलेज नोटिस की पृष्ठभूमि में यह समझना जरूरी है कि संसद के सदस्यों को वास्तविक और सत्यापित जानकारियां प्रदान करना सांसदों और मंत्रियों की जिम्मेदारी होती है, खासकर जब वे देश की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर बोल रहे हों। वेणुगोपाल ने यह नोटिस इसलिए दिया है ताकि इस मुद्दे की पूर्ण जांच हो सके और संसद के विश्वास और प्रतिष्ठा की रक्षा हो।

राजनाथ सिंह ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे इस मुद्दे पर सख्त जांच की मांग करेंगे और सत्य सामने आने तक इसे संसद के समक्ष उठाते रहेंगे।

यह घटना भारतीय संसद के कामकाज और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर एक अहम विषय बन गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के नोटिस संसद के सदस्यों के बीच जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने का माध्यम होते हैं।

वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में, जहां सरकार और विपक्ष के बीच लगातार टकराव हो रहे हैं, यह मामला विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि संसद इस प्रिविलेज नोटिस के बाद क्या कार्रवाई करती है और क्या रक्षा मंत्री पर कोई औपचारिक जांच होती है।

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