स्टैनफोर्ड में Google के सुंदर पिचाई का Project Nimbus को लेकर बोझिल स्वागत

स्टैनफोर्ड, कैलिफोर्निया – प्रॉ-फिलिस्तीनी समर्थकों ने Google और इजरायल के बीच Project Nimbus नामक अनुबंध के खिलाफ स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में जोरदार प्रदर्शन किया। इस अनुबंध को लेकर छात्रों और स्थानीय समूहों में गहरा विरोध व्याप्त है, जिसने Google के सीईओ सुंदर पिचाई के स्टैनफोर्ड अभियान में उपस्थिति के दौरान माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है।

Project Nimbus एक क्लाउड सेवा अनुबंध है जो Google और इजरायल की सरकार के बीच हुआ है। इस परियोजना के तहत Google, इजरायल और पश्चिमी तट क्षेत्रों के कई सरकारी संगठनों को क्लाउड कंप्यूटिंग सेवाएं उपलब्ध कराता है। हालांकि, इसका विरोध इसलिए जताया जा रहा है क्योंकि प्रॉ-फिलिस्तीनी समर्थकों का मानना है कि यह अनुबंध फिलिस्तीनी अधिकारों का उल्लंघन करता है और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों को तकनीकी समर्थन देता है।

स्थानीय समूहों और छात्रों ने इस कार्यक्रम को ‘सांस्कृतिक उत्पीड़न’ और ‘नैतिक भूल’ बताते हुए Google के इस अनुबंध के खिलाफ आवाज उठाई है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि Google इस प्रकार के अनुबंधों से वापस लौटे और मानवाधिकारों का सम्मान करे।

सुंदर पिचाई के इस आयोजन में उपस्थिति के दौरान विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। कई प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए और मंच के निकट प्रदर्शन किया, जिससे कार्यक्रम आयोजन में बाधाएं आईं। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए, लेकिन माहौल तनावपूर्ण रहा।

Google ने अपने बयान में कहा है कि Project Nimbus ग्राहक सुरक्षा और डेटा गोपनीयता को प्राथमिकता देता है, और उनकी सेवाओं का उपयोग मानवीय गतिविधियों के लिए ही किया जाता है। कंपनी ने यह भी कहा कि वे अपने अनुबंधों के नैतिक पक्षों पर सतर्क हैं और अपने ग्राहकों के साथ पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

फिलहाल, इस विवाद ने टेक्नोलॉजी के नैतिक प्रयोग और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के बीच की जटिलताओं को उजागर कर दिया है। प्रॉ-फिलिस्तीनी समूह इस मामले को लेकर जागरूकता बढ़ाने और अन्य टेक कंपनियों को भी नैतिक मानदंड अपनाने के लिए आह्वान जारी कर रहे हैं।

यह घटनाक्रम इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक बड़े तकनीकी उद्यमों के फैसले किस प्रकार से सामाजिक और राजनीतिक सुरक्षा के सन्तुलन को प्रभावित कर सकते हैं। स्टैनफोर्ड में पिछले दिनों हुए यह प्रदर्शन इस विवाद की एक मुख्य मिसाल बन गया है।

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