ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद गुरु सुदीप बंद्योपाध्याय हो सकते हैं बागी तृणमूल सांसदों के कैम्प में शामिल

नई दिल्ली, दिल्ली। राजनीतिक हलकों में सियासी सरगर्मियां तेज होती नजर आ रही हैं क्योंकि ममता बनर्जी के करीबी और तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने हाल ही में नई दिल्ली का दौरा किया। इस दौरे के दौरान उन्होंने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब बागी तृणमूल सांसद संसद परिसर में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने वाले हैं और केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के समर्थन में स्वतंत्र दल के रूप में दावा पेश करने जा रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुदीप बंद्योपाध्याय की यह दिल्ली यात्रा और उनके केंद्रीय मंत्री से संपर्क भाजपा और राजग के समर्थन वाले बागी दल के गठन के संकेत दे रहे हैं। बागी तृणमूल सांसदों का यह कदम पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल मचा सकता है। इन सांसदों ने पार्टी की रणनीति से असहमति जताई है और अब वे भाजपा समर्थित केंद्र सरकार के साथ मिलकर अपनी नई राजनीतिक पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।

पिछले कुछ वर्षों में तृणमूल कांग्रेस में कई सांसदों और नेताओं के बीच मतभेद उभर कर सामने आए हैं, खासकर 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद। इन मतभेदों के चलते बागी सांसदों ने पार्टी से अलग होकर अपने राजनीतिक करियर को अलग दिशा देने की योजना बनाई है। सुदीप बंद्योपाध्याय, जो पार्टी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में से एक माने जाते हैं, उनके इस मोड़ से तृणमूल की भविष्य की रणनीति और भी जटिल हो सकती है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि सुदीप बंद्योपाध्याय की केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसमें आगे की राजनीतिक योजना पर चर्चा हुई है। यह भी कहा जा रहा है कि इन बातों के बाद बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर नए गठबंधन के लिए अपनी आधिकारिक स्थिति दर्ज कराएंगे।

इस बीच, ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस का कोई भी वरिष्ठ पदाधिकारी इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दे पाया है। लेकिन पार्टी के आंतरिक सूत्रों के अनुसार, यह स्थिति पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है, खासकर राज्य में 2024 के आम चुनावों से पहले।

राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अगर सुदीप बंद्योपाध्याय और बागी सांसद भाजपा के साथ मिल कर अपना एक स्वतंत्र दल बनाते हैं, तो इससे तृणमूल कांग्रेस की साख पर असर पड़ सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पार्टी की पकड़ मजबूत मानी जाती है। दूसरी ओर, भाजपा के लिए यह एक अवसर है कि वे पश्चिम बंगाल में अपनी पहुंच बढ़ा सकें और राज्य की राजनीति में अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा सकें।

सामूहिक रूप से देखा जाए तो सुदीप बंद्योपाध्याय की दिल्ली यात्रा, उनके केंद्रीय मंत्री से मुलाकात और बागी सांसदों का लोकसभा अध्यक्ष से मिलना पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है। आगामी दिनों में इस संदर्भ में और भी राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं, जो पूरे देश की राजनीति पर प्रभाव डालेंगी।

Source

error: Content is protected !!