नई दिल्ली, भारत – बड़ी भाषा मॉडल (Large Language Models) को प्रशिक्षित करना महंगा और जटिल कार्य है, जिसके चलते राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से विदेशी तकनीक पर अधिक भरोसे से चिंतित रहे हैं। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे संवेदनशील क्षेत्र में, इस पर निर्भरता को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है।
इंटरनेशनल टेक्नोलॉजी और सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता से राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं। इन मॉडलों की सहायता से देश की रणनीतिक या संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इसके साथ ही, ऐसे विदेशी प्लेटफॉर्म पर नियंत्रण सीमित होने के कारण डेटा प्राइवेसी और सार्वभौमिक नियंत्रण भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
हाल ही में, अमेरिका ने Anthropic कंपनी के Mythos और Fable नामक बड़े भाषा मॉडल पर रोक लगा दी है। इस कदम को AI क्षेत्र में संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका की यह पहल दर्शाती है कि विदेशी तकनीक के उपयोग पर नियंत्रण आवश्यक है ताकि अपनी तकनीकी स्वतंत्रता और सुरक्षा संरक्षित रखी जा सके।
विश्लेषकों का कहना है कि बड़े भाषा मॉडलों को विकसित करने की लागत न केवल वित्तीय है, बल्कि यह तकनीकी संसाधनों और विशेषज्ञता का भारी निवेश भी मांगती है। ऐसे में देश को अपने स्वामी तकनीक और अनुसंधान को विकसित करने की दिशा में काम करना होगा, ताकि विदेशी निर्भरता कम की जा सके।
राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से, स्थानीय क्षमता निर्माण, मजबूत नीति निर्माण और तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करना अनिवार्य है। केवल तकनीक की उपलब्धता ही पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि इसकी नियंत्रण क्षमता और नियामक फ्रेमवर्क भी सशक्त होना चाहिए।
वर्तमान वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में, विकसित और विकासशील दोनों देशों के लिए यह आवश्यक है कि वे टेक्नोलॉजी क्षेत्र में स्वायत्तता हासिल करें। इससे न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि आर्थिक और तकनीकी दृष्टि से भी समृद्धि आएगी।
इस प्रकार, विदेशी तकनीक पर आंधी की तरह आश्रित रहने के बजाय, अपनी तकनीकी श्रेष्ठता और स्वायत्तता की दिशा में निवेश और प्रयास करना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। यूएसए का Anthropic मॉडल पर रोक लगाना इस रणनीति की शुरुआत हो सकती है, जो अन्य देशों के लिए भी एक बोधक है।
