बेंगलुरु, कर्नाटक। बीते कुछ दिनों में टीएनपीडीसीएल की 18 हार्ड डिस्क चोरी होने की खबर सामने आई थी, लेकिन पुलिस जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आरोपी के कब्जे से कुल 34 हार्ड डिस्क बरामद हुई हैं, जिनमें से कोई भी incriminating सामग्री नहीं मिली है। इस मामले की जांच अब ग्रेटर चेन्नई पुलिस से लेकर सीबी-सीआईडी को सौंप दी गई है।
सूत्रों ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उनके ठिकाने से छापेमारी की तो 34 हार्ड डिस्क हाथ लगीं। हालांकि, इनमें से stolen हार्ड डिस्क की संख्या 18 बताई गई है, बाकी अन्य हार्डवेयर हो सकते हैं। जांच के दौरान किसी भी असामाजिक या आपराधिक जानकारी या फाइलें नहीं पाई गईं, जिससे यह साफ होता है कि चोरी की गई हार्ड डिस्क में कोई संवेदनशील या अवैध डेटा नहीं था।
ग्रेटर चेन्नई पुलिस ने मामले की जांच रिपोर्ट सीबी-सीआईडी को सौंप दी है ताकि गहरे स्तर पर जांच की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि हार्ड डिस्क की चोरी की भनक क्या थी और करीब 34 हार्ड डिस्क आरोपी के पास कैसे आईं, इस पर विस्तृत जांच जारी है। साथ ही, आरोपियों के नेटवर्क और संभव षड्यंत्र को भी खंगाला जा रहा है।
टीएनपीडीसीएल व्यवस्थापकों ने बताया कि चोरी गई हार्ड डिस्क में कोई भी आपराधिक डाटा नहीं होने के कारण कंपनी के संचालन पर फिलहाल कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। कंपनी ने सुरक्षा उपायों को और सख्त करने की बात कही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
प्रभारी अधिकारी ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा, “हम इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे। चूंकि मामले को सीबी-सीआईडी को सौंपा गया है, इसलिए टीम पूरी जांच कर रही है और जल्द ही दोषियों को दंडित किया जाएगा।”
इस घटना ने विभागों के बीच बेहतर समन्वय और सूचना साझा करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया है, जिससे चोरी और डेटा सुरक्षा से संबंधित खतरों को समय रहते रोका जा सके।
स्थानीय लोगों ने इस मामले को लेकर पुलिस की कार्रवाई की सराहना की है, साथ ही यह उम्मीद जताई कि भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी और अपराधियों को सख्त कार्रवाई के तहत लाया जाएगा।
