ओवैसी ने एसआईआर के बाद मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों को कल्याण लाभ से वंचित करने की निंदा की

हैदराबाद, तेलंगाना। ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार की एक नई जनसंख्या पंजीकरण प्रणाली, सेक्योरिटी ऑफ रजिस्ट्रेशन (SIR) के तहत मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों को कल्याणकारी योजनाओं से वंचित करने की नीति की कड़ी आलोचना की है।

ओवैसी ने शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि सरकार द्वारा चलाई जा रही welfare योजनाएं सभी पात्र नागरिकों के लिए हैं, और इन लाभों को मतदाता सूची में नामांकन से जोड़ना नीतिगत रूप से गलत है। उन्होंने इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया और कहा कि किसी भी नागरिक को अधिकारों से वंचित करना अनुचित है।

उन्होंने कहा, “सरकार का यह रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। welfare योजनाएं प्रदेश की जनता के लिए हैं, उन्हें मतदाता सूची से जोड़ना या हटाना उचित नहीं। जो लोग एसआईआर के बाद मतदाता सूची से बाहर हुए हैं, उन्हें उनके अधिकार और लाभ वापस मिलने चाहिए।”

ओवैसी ने यह भी चेतावनी दी कि अगर सरकार इस दिशा में सुधार नहीं करती है, तो AIMIM इस मुद्दे पर सशक्त आंदोलन करेगी ताकि सभी नागरिकों को समान और न्यायसंगत कल्याण मिले।

सरकार ने SIR सिस्टम को जनसंख्या पंजीकरण की सटीकता बढ़ाने के लिए लागू किया था, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि केवल योग्य और सत्यापन किये गए लोग ही मतदाता सूची में शामिल हों। लेकिन इसकी वजह से कुछ गरीब और वंचित तबके के लोग बिना किसी गलती के वोटर लिस्ट से बाहर हो गए हैं, जिससे वे सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस प्रकार की नीतियों को अधिक समय तक नहीं सुधारा गया, तो इससे सामाजिक असंतोष बढ़ सकता है और गरीब तबकों की स्थिति और खराब हो सकती है।

इस मामले में विपक्षी पार्टियां भी बहस कर रही हैं और सरकार से निवेदन कर रही हैं कि SIR के कारण प्रभावित व्यक्तियों की मदद की जाए और उन्हें पुनः मतदाता सूची में जोड़ा जाए ताकि वे सरकार की welfare योजनाओं का लाभ उठा सकें।

अखिल भारतीय स्तर पर यह मामला एक बड़ा और संवेदनशील विषय बन गया है, क्योंकि चुनावी और कल्याणकारी दोनों दृष्टिकोण से इस पर व्यापक चर्चा की जरूरत है।

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