हिमाचल सरकार का अहम फैसला: पंचायत प्रधानों का शपथ ग्रहण अब जिला स्तर पर होगा

शिमला, हिमाचल प्रदेश। हिमाचल प्रदेश सरकार ने पंचायत प्रधान और उपप्रधानों के शपथ ग्रहण समारोह के संचालन में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। सरकार ने निर्णय लिया है कि अब से यह शपथ ग्रहण समारोह जिला स्तर पर आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने जानकारी दी कि 15 जून को विभिन्न जिलों में यह कार्यक्रम होगा, जिसमें मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। मुख्यमंत्री स्वयं कांगड़ा जिले के धर्मशाला में पंचायत प्रधानों को शपथ दिलाएंगे, जबकि अन्य जिलों में संबंधित मंत्री यह कार्य करेंगे।

मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि यह निर्णय मुख्यत: व्यवस्था को सरल बनाने, खर्च कम करने और पंचायत प्रतिनिधियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। पहले शपथ ग्रहण समारोह उपमंडल या अन्य निचले स्तर पर आयोजित किए जाते थे, जिससे कई तरह की परेशानियाँ होती थीं। दूर-दराज के इलाकों जैसे किन्नौर, भरमौर, लाहौल-स्पीति आदि से पंचायत सदस्यों को शिमला या अन्य दूरस्थ स्थानों तक आना पड़ता था, जो समय और धन दोनों की बर्बादी थी।

मंत्री ने आगे बताया कि अनेक बार प्रतिनिधियों को समारोह में शामिल होने के लिए एक दिन से अधिक यात्रा करनी पड़ती थी, जिसके कारण कुल मिलाकर दो से तीन दिन का समय और अतिरिक्त लागत लग जाती थी। इसके अतिरिक्त ठहरने और यात्रा के खर्च से सरकार पर आर्थिक बोझ भी पड़ता था। इसी वजह से कई पंचायती प्रतिनिधि समय पर शामिल नहीं हो पाते थे।

हर्षवर्धन चौहान ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रिया को सुगम और प्रभावी बनाना है। इसलिए अब जिला स्तर पर शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किए जाएंगे ताकि सभी प्रतिनिधि आसानी से इस कार्यक्रम में भाग ले सकें और किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा तथा प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी।

मंत्री ने यह भी बताया कि पंचायती राज अधिनियम में शपथ ग्रहण कराने के लिए कोई विशेष कानूनी बाध्यता नहीं है कि इसे किस स्तर पर कराया जाए। इसलिए सरकार ने प्रशासनिक निर्णय के तहत यह नया प्रावधान लागू किया है। इस प्रक्रिया के दौरान जिला स्तर पर उपायुक्त की उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे कार्यक्रम का सुचारु संचालन हो सके।

अंत में मंत्री ने कहा कि मंत्री सरकार का हिस्सा होते हुए शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा ले सकते हैं। यह व्यवस्था प्रशासनिक सुविधा और संसाधनों के उचित उपयोग को ध्यान में रखकर बनायी गयी है ताकि पंचायत प्रतिनिधियों का प्रतिनिधित्व बेहतर और सहज हो सके। इस नए बदलाव से न केवल प्रशासनिक कार्य में सुगमता आएगी बल्कि ग्रामीण विकास की प्रक्रिया और भी प्रभावी होगी।

Source

error: Content is protected !!