आईडीएफसी बैंक धोखाधड़ी मामले में ईडी का शिकंजा, रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वधवा गिरफ्तार

चंडीगढ़, हरियाणा। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आईडीएफसी बैंक से जुड़े एक बड़े धोखाधड़ी मामले में रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वधवा को गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी के बाद ईडी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत जांच तेज कर दी गई है।

ईडी की जांच में सामने आया है कि हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और चंडीगढ़ व पंचकूला के दो निजी स्कूलों के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खातों से लगभग 645 करोड़ रुपए के सरकारी फंड का गबन किया गया है। इस मामले के मुख्य आरोपियों में विक्रम वधवा के अलावा रिभव ऋषि, अभय कुमार सहित बैंक और सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं।

विक्रम वधवा पर आरोप है कि उन्होंने इस अपराध से अर्जित रकम को छिपाने और कानूनी नजर से बचाने के लिए कई कंपनियों और संस्थाओं में निवेश किया। जांच में उनकी निजी संपत्ति में 70 करोड़ से अधिक की राशि पाई गई है। इसी तरह कई अन्य अचल संपत्तियों की खरीददारी भी इस वित्तीय गबन से हुई पाई गई है।

पुलिस और ईडी के मुताबिक, गबन की गई रकम को शेल कंपनियों जैसे मेसर्स कैपको फिनटेक सर्विसेज, मेसर्स स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, आरएस ट्रेडर्स, और मेसर्स एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। इसके बाद, यह रकम कई परतों में घुमाई गई और कुछ राशि जौहरियों के पास भेजी गई, जिन्होंने इसके बदले नकद पैसे उपलब्ध कराए।

जांच में यह भी पता चला है कि रिभव ऋषि ने इस नकद धनराशि का वितरण सरकारी अधिकारियों और व्यापारियों के बीच किया, जिसमें विक्रम वधवा का नाम भी शामिल है। ईडी इस पूरे धन प्रवाह और उससे जुड़े लाभार्थियों की पहचान करने की प्रक्रिया में लगी हुई है।

विशेष न्यायालय (पीएमएलए) ने 29 मई को विक्रम वधवा को गिरफ्तार करने के बाद उन्हें 2 जून तक 4 दिनों के ईडी हिरासत में भेज दिया है। इससे पहले ईडी ने मामले के अन्य आरोपियों रिभव ऋषि और अभय कुमार को 11 मई को गिरफ्तार किया था, जो अब न्यायिक हिरासत में हैं। जांच अब भी जारी है और इससे जुड़े और खुलासों की उम्मीद है।

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